चार बार वर्ल्ड कप में हिस्सा ले चुकी आर्चरी खिलाड़ी तृष्णा, जितना अपने खेल से प्यार करती हैं, वे उतनी ही सरकारी रैवये से खफा हैं।
उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में मेडल जीतने के बावजूद उसे स्पोर्ट्स कोटे में किसी भी विभाग में अभी तक नौकरी नही मिली।
आर्चरी खिलाड़ी तृष्णा शनिवार को चंडीगढ़ में मौजूद थीं। वह पंजाब यूनिवर्सिटी में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी आर्चरी (मेन/वुमन) चैंपियनशिप में पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला की ओर से हिस्सा ले रही हैं।
गौरतलब है कि तृष्णा 2013 में चीन तुर्की, कोलंबिया, पौलेंड में चार बार वर्ल्ड कप में हिस्सा लेकर मेडल जीत चुकी हैं। तृष्णा ने कहा कि आर्चरी में रिकर्व इवेंट में खेलने वाले खिलाड़ियों को आसानी से नौकरी मिल जाती है क्योंकि यह ओलंपिक गेम्स का हिस्सा हैं।
एक लाख का आता हैं बो
तृष्णा ने कहा कि निशाना साधने वाला (बो) एक लाख से ऊपर का आता हैं। इसके तीर भी महंगे आते हैं। इसका सारा खर्चा हमें खुद उठाना पड़ता हैं।
पीयू में 22 तक चैंपियनशिप
पीयू के ग्राउंड में 18-22 जनवरी के बीच आर्चरी चैंपियनशिप चल रही है। चैंपियनशिप में देश भर से 75 यूनिवर्सिटी से 800 आर्चर हिस्सा ले रहे हैं। पंजाबी यूनिवर्सिटी की छात्रा तृष्णा आर्चरी में कंपाउंड इवेंट में हिस्सा लेती हैं। इस खिलाड़ी ने बताया कि देश में अब कई जगह आर्चरी की एकेडमी खुल चुकी हैं। अभिभावक भी अब अपने बच्चों को इस खेल में डाल रहे हैं। पिछले सालों की उपेक्षा अब अधिक खिलाड़ी अर्चरी के खेल की ओर आकर्षित हो रहे हैं।