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सिख ‘पंथ’ के बजाय सिख ‘धर्म’ का हो इस्तेमाल, फूलका ने लिखी चिट्ठी 

Mon, 18 Nov 2019 03:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, अमृतसर
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एचएस फूलका - फोटो : सोशल मीडिया
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सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील एचएस फूलका ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को पत्र लिखकर सुझाव दिया है कि विश्व भर की अलग-अलग डिक्शनरियों में सिख पंथ के स्थान पर सिख धर्म का प्रयोग किया जाए। 

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जत्थेदार को लिखे एक पत्र में वकील एचएस फूलका ने कहा कि यह उनके निजी विचार हैं। सिख विद्वानों की एक कमेटी का गठन किया जाए जो इस मुद्दे पर विचार करें। ताकि भविष्य में कोई भी सिख पंथ की गलत व्याख्या न कर सके।

श्री अकाल तख्त को लिखे पत्र में वकील एचएस फूलका ने ज्ञानी हरप्रीत सिंह को याद दिलाया कि उन्होंने 14 नवंबर को एक पत्र उन्हें लिखा था। इस पत्र में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या में राम मंदिर भूमि के बारे में दिए गए फैसले में इस्तेमाल किए गए शब्द सिख ‘कल्ट’ के बारे में लिखा गया था। 
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पैरा नंबर 154-155 में साफ लिखा है कि सिख मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करते। उनका विश्वास श्री गुरु ग्रंथ साहिब में है। फैसले में सिख धर्म का भी उल्लेख किया गया है। इस फैसले के साथ 116 पन्ने का एक अलग जोड़ लगा हुआ है जिसमें किसी भी जज के हस्ताक्षर नहीं है। इन पन्नों में राजिंदर सिंह की गवाही का उल्लेख किया गया है। 

राजिंदर सिंह ने अपनी गवाही में कहा है कि उन्होंने सिख कल्ट के बारे में कई किताबें पढ़ी हैं। इससे प्रतीत होता है कि राजिंदर सिंह ने अपनी गवाही में ‘सिख पंथ’ शब्द का प्रयोग किया होगा लेकिन अनुवाद करते समय पंथ के लिए कल्ट शब्द का प्रयोग किया गया होगा। फूलका ने कहा कि उनसे इस शब्द के अर्थ के बारे में कई बार पूछा गया है। 

जब उन्होंने कल्ट के पंजाबी अर्थ जानने के लिए पंजाबी भाषा की डिक्शनरियों को खंगाला तो उन्हें ताज्जुब हुआ कि मान्यता प्राप्त  कई डिक्शनरियों में ‘कल्ट’ का पंजाबी अर्थ ‘पंथ’ लिखा हुआ था। अंग्रेजी में कल्ट शब्द को बहुत अच्छा नहीं समझा जाता। सिख पंजाबी में सिख धर्म के लिए सिख पंथ का इस्तेमाल करते है। ऐसे में यदि कोई भी सिख पंथ का अंग्रेजी अनुवाद करेगा तो वह कल्ट लिखेगा।

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