पंजाब यूनिवर्सिटी के हॉस्टल छात्रों से खाली करवाने के विरोध में विद्यार्थियों ने वीसी कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। दिनभर कोई अधिकारी उनकी बात सुनने नहीं पहुंचे तो छात्र आक्रोशित हो गए। उन्होंने हंगामा तेज कर दिया और नारेबाजी की।
वीसी कार्यालय का गेट तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की, लेकिन छात्र कामयाब नहीं हो पाए। बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स ने उन्हें रोका। इस दौरान सुरक्षा कर्मियों से नोकझोंक के बाद हाथापाई की नौबत भी आई। आखिर में तीन वार्डन पहुंचे और छात्रों की बात सुनीं। शनिवार को सुबह 11 बजे बैठक में इस प्रकरण पर निर्णय लिया जाएगा। उसके बाद छात्र शांत हुए।
वीरवार को कुछ वार्डन ने हॉस्टलों में जाकर छात्रों से कहा कि वह हॉस्टल खाली कर दें और अपने घर चले जाएं। कहा गया कि कोरोना कभी भी बढ़ सकता है। ऐसे में उन्हें दिक्कतें हो सकती हैं। पीयू ने छात्रों के हितों को ही ध्यान में रखा, लेकिन छात्र घर जाने को तैयार नहीं थे। छात्रों ने यह बात एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं को बताई तो वह विरोध पर उतर आए।
शुक्रवार को सुबह 9.00 बजे हॉस्टल के छात्र व एनएसयूआई के कार्यकर्ता पीयूसीएससी के पूर्व उपाध्यक्ष राहुल कुमार, मुकुल के नेतृत्व में वीसी कार्यालय पहुंच गए। वहां धरना देना शुरू कर दिया। उसके बाद नारेबाजी की। धरना देते देते दोपहर के दो बज गए, लेकिन कोई भी अधिकारी उनकी बात सुनने नहीं पहुंचा।
उसके बाद छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पहुंच गया। उन्होंने नारेबाजी और तेज कर दी। खतरा भांपकर पुलिस फोर्स बुला ली गई। उसके बाद छात्रों ने वीसी कार्यालय में घुसने की कोशिश की तो सुरक्षा कर्मियों ने गेट बंद कर दिया। इस गेट को खोलने की कोशिश की गई। उसके बाद सभी छात्रों ने गेट को खूब हाथों से बजाया और धक्के मारे, लेकिन गेट नहीं टूटा।
सुरक्षा कर्मियों ने छात्रों को समझाने की कोशिश की। इस दौरान धक्का मुक्की भी हो गई। हंगामा बढ़ता जा रहा था। उसके बाद पूर्व उपाध्यक्ष राहुल ने डीएसडब्ल्यू से बात की। उन्होंने तीन वार्डन छात्रों की बात सुनने को भेजे। वार्डन आए और उन्होंने छात्रों की समस्या सुनी। कहा कि इस प्रकरण में शनिवार को दिन में 11 बजे बैठक होगी। इसमें निर्णय लिया जाएगा। छात्रों की मांग पर इस बैठक में पूर्व उपाध्यक्ष राहुल कुमार भी शामिल होंगे जो छात्रों की बात को रख सकेंगे। उसके बाद छात्र शांत हुए और अपने घरों को चले गए।