गांव चिल्ला में 24 अक्तूबर को दिवाली मनाई जाएगी। गांव के पूर्व सरपंच अजायब सिंह ने बताया कि पुराने जमाने में यहां के लोग भैंसे चराने का काम करते थे।
वे दिवाली के दिन भैंसों को एक जगह रोक कर अपने अपने घरों में आ गए। थोड़ी देर बाद एक व्यक्ति भैंसों को देखने गया, तो वहा पर सभी भैंसें गायब थी। तो उस ने गांव निवासियों को आकर बताया, तो फिर सारा गांव पूरी रात भैंसों की तलाश करता रहा।
गांव की महिलाओं ने पुरुषों की गैर मौजूदगी में दिवाली का माथा ठीक न समझा, लेकिन सुबह तक सभी भैंसें मिल गईं। अब तक गांव में दिवाली की रात को अशुभ मानते हुए लोगों ने दूसरे दिन दिवाली मनाने का फैसला किया। पीढ़ी दर पीढ़ी यहां दिवाली के अगले दिन दिवाली मनाई जाती है।
गांव के पूर्व सरपंच बहादुर सिंह ने बताया कि दिवाली के दिन यहां के लोग अपने अपने रिश्तेदारों के घर दिवाली मनाने चले जाते हैं और अगले दिन वे सारे लोग चिल्ला में दिवाली मनाते हैं।