कई लोग मतदान करने के लिए नहीं जाते हैं। इसके उल्ट इस गांव के लोगों को सुविधाएं नहीं मिली, फिर भी यहां रहने वाले वोट डालने से नहीं चूके। ये बाशिंदे हैं होशियारपुर के गांव तक्खनी घट्टी के। गांव के करीब 20 परिवारों के 70 से ज्यादा वोटर हैं।
आजादी के इतने साल बाद भी कंडी इलाके के नीम पहाड़ी आंचल में बसे गांव तक्खनी घट्टी में पीने का साफ पानी और ढंग का रास्ता नहीं है। इसके बावजूद गांव के लोग वोट देने जरूर जाते हैं।
सड़क तो है लेकिन घट्टी तक पहुंचने का रास्ता कुछ ऐसा कि बरसात हो तो ढलान पर चढ़ना-उतरना दोनों मुश्किल है। महिलाएं डेढ़ दो किलोमीटर तक सिर पर घड़े उठाए या निचले इलाके में लोगों के निजी नलकों से पानी लाती हैं और या फिर पंचायत की ओर से लगे नलके से पानी भरा जाता है।
फिर भी पानी ऐसा कि न पीते बने न छोड़ते। कई चुनाव आए और गए, हर बार नेताओं से अपनी व्यथा कही, सबने सुनी और हर हाल में पानी का मसला हल करने के वादे भी किए लेकिन पूरा किसी ने नहीं किया। एक प्राइमरी स्कूल है, वो भी गांव से दूरी पर है।