डिस्लेक्सीया से पीड़ित हेेेेमंत अपनी मां के साथ्ा
- फोटो : अमर उजाला
कहा जाता है एक कमजोरी हो तो दो खूबियों को अपनी ताकत बना लो, फिर कमजोरी पर कम ही ध्यान जाता है। कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है गवर्नमेंट रिहेब्लीटेशन इंस्टीट्यूट फॉर इंटेलेक्चुअल डिस्अबलिटिज (ग्रिड) के छात्र हेमंत ने। हेमंत डिस्लेक्सीया से पीड़ित है, लेकिन वह 12वीं पास कर चुका है।
स्केटिंग, स्विमिंग, लॉन टेनिस और टेबल टेनिस बहुत बढ़िया खेलता है। चारों में से जिस खेल की प्रतियोगिता हो जाए तो उसमें अपना जौहर दिखाने से पीछे नहीं हटता। तीन दिन चली स्पेशल बच्चों की खेल प्रतियोगिता में उसके द्वारा टेबल टेनिस में तीसरा स्थान प्राप्त किया गया। डिस्लेक्सीया की चुनौती के बावजूद हेमंत को मल्टी टास्क में मजबूत बनाने में उसकी मां अनीता ने सबसे अहम भूमिका निभाई।
स्पोर्ट्स के बाद अब हेमंत ने कंप्यूटर को अपना नया शौक बना लिया है। खास बात यह है कि कंप्यूटर की कोचिंग के लिए हेमंत एक्टिवा खुद चलाकर जाता है, जो उसकी मां ने कड़ी मेहनत से सिखाया। हेमंत की मां अनीता ने बताया कि बैटरी वाली साइकिल से उसे सीखाना शुरू किया। खुद उसके साथ एक्टिवा पर चली तो हेमंत भी सीख गया। अब उनके सामने अगली चुनौती है कि हेमंत आगे जाकर कहां सेटल होगा? यह टास्क उनके लिए काफी बड़ा है और इसके लिए काम कर रही हैं।