चंडीगढ़ में डॉग्स को लेकर पहली बार बेहद अनोखी सी कवायद की गई है। आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन ये काफी अच्छी पहली है। चंडीगढ़ आमतौर पर विदेशी नस्ल के डॉगी को रखने का शौकीन माना जाता है, लेकिन बीते दिनों डॉग शो में एक नया कल्चर को देखने को मिला।
चंडीगढ़ प्रशासन के एनिमल हस्बेंडरी डिपार्टमेंट की ओर से डॉग शो में अपना एक कैंप लगाया और देसी नस्ल के कुत्तों को गोद लेने के लिए लोगों को जागरूक किया। इस अभियान में डिपार्र्टमेंट में काफी हद तक कामयाब हुआ है। देसी नस्ल के 12 में से आठ पपीज को नए परिवार मिले। यह पहली बार है, जब देसी नस्ल के कुत्तों को गोद लेने के लिए प्रशासन और लोगों की ओर से ऐसी सक्रियता देखी गई।
इनको भी घर और प्यार मिलना चाहिए
सेक्टर 34 सी में रहने वाली नवदीप आनंद ने भी कैंप से एक देसी नस्ल का डॉगी गोद लिया है। उन्होंने बताया कि उन्हें पता भी नहीं था कि डॉग शो जैसा कोई कार्यक्रम हो रहा है। जब पहुंचे तो वहां पर एक से बढ़कर एक डॉगी थे, लेकिन जो सुकून देने वाला मंजर था, वह एनिमल हस्बेंडरी के कैंप में था। यहां पर बहुत ही क्यूट पपीज थे।
बात करने पर पता चला कि ये बच्चे उन डॉगी के हैं, जो सड़क पर बुरी हालत में मिले थे। उनकी देखभाल की गई और बच्चों को जन्म दिया। जिस तरह से विदेशी नस्ल के कुत्तों को छत और प्यार मिलता है, ठीक वैसा ही प्यार इन कुत्तों को भी मिलना चाहिए। नवदीप डॉगी को गोद लेकर काफी खुश हैं।
किसी एक तो बचाएं
dog show
सेक्टर 20 की रहने वाली सिमरन कौर सिम्मी ने भी डॉग शो से देसी नस्ल के एक पपी को गोद लिया है। उनके पास पहले से ही पग ब्रीड का एक डॉगी है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने देसी डॉगी को भी अपने घर में जगह दी।
वीजा कंसलटेंट के तौर कार्यरता सिमरन ने बताया कि यदि ये डॉगी सड़कों या गलियों में रहते तो इनमें कोई भी नहीं बचता, जो बचता वह खूंखार बनता और लोगों को काटता। इससे अच्छा है कि इन्हें घर ले जाएं और उसका पालन-पोषण करें। जिस कैंप से लेकर आईं हूं, वह काफी एक्टिव है। यदि विदेशी की बजाय इन्हें पालेंगे तो स्ट्रे डॉग की प्राब्लम काफी हद तक दूर हो सकती है।
विदेशी से ज्यादा बेहतर है देसी नस्ल के कुत्ते
एनिमल हस्बेंडरी के ज्वाइंट डायरेक्टर डा. कंवरजीत सिंह ने बताया कि विदेशी नस्ल के मुकाबले देसी नस्ल के कुत्ते ज्यादा बेहतर हैं। देसी नस्ल के कुत्तों का इम्यून सिस्टम काफी मजबूत होता है। इससे वे बहुत कम बीमार पड़ते हैं। हैवी डाइट नहीं है। जिस तरह की ट्रेनिंग देंगे, वैसे ही ये ट्रेंड हो जाएंगे। यदि कोई डिपार्टमेंट से डॉगी को गोद लेता है तो उसे फ्री इलाज की सुविधा भी दी जाती है।
एनिमल हस्बेंडरी डिपार्टमेंट ने एक साल पहले जानवरों के हितों के लिए काम करने वाली एसपीसीए को एडाप्ट किया था। उसके बाद से देसी नस्ल के कुत्तों को गोद लेने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाने के बारे में सोचा गया था। जो भी हमें घायल अवस्था में कुत्ते मिलते थे, उन्हें एसपीसीए में ले आते हैं और उनका इलाज करने के बाद पालन पोषण करते हैं। कोई भी व्यक्ति डिपार्टमेंट में आकर डागी को गोद ले सकता है। ये एडाप्टशन पूरी तरह से मुफ्त होता है।