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कृषि कानूनों पर स्मृति ईरानी का संवाद, बोलीं- किसान नहीं, कांग्रेस कर रही विरोध

Thu, 15 Oct 2020 05:42 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बठिंडा (पंजाब)
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स्मृति ईरानी ने पंजाब के किसानों से किया संवाद। - फोटो : @tarunchughbjp
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कृषि कानूनों का विरोध किसान नहीं बल्कि कई वर्षों तक सत्ता में रही कांग्रेस पार्टी कर रही है। कांग्रेस ने किसानों के लिए कभी कुछ नहीं किया। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए कृषि कानून बनाए तो कांग्रेस ने किसानों को मोहरा बनाकर विरोध शुरू कर दिया। ये बात केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने वर्चुअल प्रेसवार्ता में कही। 

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उन्होंने पंजाब सरकार से पूछा कि गेहूं की एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) का भुगतान पांच साल में मात्र डेढ़ लाख करोड़ रुपये ही क्यों किया गया जबकि मोदी सरकार ने गेहूं की एमएसपी तीन लाख करोड़ रुपये सुनिश्चित की है। किसानों को सपने दिखाकर कांग्रेस हमेशा सत्ता में आई लेकिन किसान के खाते में पहली बार किसान सम्मान निधि के तहत मोदी सरकार ने पैसे पहुंचाए। एक साल में देश के 10 करोड़ किसानों के खाते में सीधा 90000 करोड़ से ज्यादा की राशि केंद्र सरकार ने पहुंचाई। 

न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी रहेगा
स्मृति ईरानी ने कहा कि कृषि कानून लागू होने के बाद भी न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी रहेगा। इस बिल के तहत किसान देश के किसी भी शहर, व्यक्ति, संगठन और गांव में फसल बेच सकता है। किसान को उसकी फसल का भुगतान तीन दिन में करना ही पड़ेगा। जब कानून में सुनिश्चित किया गया कि किसान की जमीन ना बेची जा सकती है, ना गिरवी रखी जा सकती है, ना कोई किसान की जमीन को हाथ लगा सकता है तो कांग्रेस ने किसानों की आड़ में राजनीतिक लाभ प्राप्त करने की कोशिश शुरू कर दी। अब कांग्रेस के बारे में देश का हर एक नागरिक जान चुका। 
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बिल की हर स्थिति के बारे में जानता था अकाली दल 
उन्होंने कहा कि अकाली दल को कृषि कानूनों की हर स्थिति के बारे में पता था। उन्हें कृषि कानून पास किए जाने की जानकारी थी। अब ऐसी क्या मजबूरी है कि अकाली दल के सांसद कह रहे हैं कि उनको कानून के बारे में पता नहीं था। वो अकाली दल के बारे में ज्यादा टिप्पणी नहीं करेंगी। 

किसानों के साथ कृषि सचिव को बैठक ही बैठक करनी थी
केंद्रीय मंत्री ईरानी ने कहा कि किसानों को केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली में बैठक के लिए बुलाया गया था। इसके तहत केंद्र सरकार के कृषि सचिव को ही किसानों के साथ बैठक करनी थी लेकिन किसान नेता बिना कोई बात सुने कानून को फाड़कर बैठक छोड़ चले आए। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर लगातार कृषि विशेषज्ञों के साथ बात कर जानने की कोशिश कर रहे हैं कि केंद्र सरकार की ओर से पास किए गए कृषि कानूनों में गलत क्या है। 

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