चंडीगढ़। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को आम बजट पेश करेंगी। इससे पहले रविवार को वह चंडीगढ़ पहुंचीं और शहर के उद्योगपति-व्यापारियों के साथ बैठक की। शहर में उद्योगों के हो रहे पलायन की वित्त मंत्री को जानकारी गई। उद्योगपतियों ने कहा कि चंडीगढ़ एयरपोर्ट से इंटरनेशनल फ्लाइट्स चलेंगी तभी बिजनेस आएगा। इसके अलावा एमएसएमई एक्ट को पूरी तरह से लागू करने, वैट आकलन के लिए ओटीएस योजना लाने की मांग की गई।
शहर के औद्योगिक संघों के संयुक्त मंच के प्रतिनिधिमंडल ने आगामी बजट के लिए मांग रखी कि रीइन्वेस्टमेंट पर लगने वाले लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगना चाहिए। उन्होंने चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को लेकर वित्त मंत्री से विस्तार से बात की। बताया कि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के नाम पर सिर्फ एक दुबई के लिए चंडीगढ़ से फ्लाइट चलती है। हर बार यह कहा जाता है कि सवारियां नहीं हैं, जबकि यह बात गलत है। दिल्ली की एक खास लॉबी है, जो चंडीगढ़ से फ्लाइट्स चलने नहीं देती है क्योंकि उन्हें नुकसान का डर है। इस वजह से हजारों करोड़ से बना चंडीगढ़ एयरपोर्ट की क्षमता का सही से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। वित्त मंत्री ने उनकी बातों को ध्यान से सुना और लिखित में देने की मांग की। पदाधिकारियों ने वित्त मंत्री को इस बारे में ज्ञापन भी दिया। उन्होंने इस मुद्दे पर काम करने का आश्वासन दिया। इसके अलावा औद्योगिक संघों के संयुक्त मंच ने वैट आकलन के लिए ओटीएस योजना की भी मांग की। लघु उद्योग भारती चंडीगढ़ इकाई के अध्यक्ष अवि भसीन व अन्य ने बताया कि चंडीगढ़ से उद्योगों का पलायन हो रहा है। ये बहुत चिंता की बात है। इस पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
जीएसटी में कुछ ब्लाइंड स्पॉट, इन्हें दूर करने की जरूरतः सलुजा
अवि भसीन ने केंद्रीय वित्तमंत्री को बताया कि एमएसएमई एक्ट में मैन्युफेक्चरिंग के साथ सर्विसेज को भी जोड़ा गया है। बावजूद इसके चंडीगढ़ में अभी भी मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस को अलग-अलग रखा गया है। यही कारण है कि एमएसएमई चंडीगढ़ में पूर्ण रूप से लागू नहीं हुआ है और नया व्यापार सर्विसेज इंडस्ट्रीज से जुड़ नहीं पाया है। यदि एमएसएमई पूर्ण रूप से लागू होता है तो 90 प्रतिशत समस्याएं ठीक हो जाएंगी और व्यापार फिर से पटरी पर आ जाएगा। ऑटोमोबाइल सेक्टर से बरिंदर सलुजा ने कहा कि जीएसटी में कुछ ब्लाइंड स्पॉट हैं, जिनकी वजह से बिजनेसमैन को परेशान किया जाता है। विभाग की तरफ से नोटिस पर नोटिस भेजा जाता है। इन्हें ठीक किया जाना चाहिए। उन्होंने जीएसटी ऑडिट का मुद्दा भी उठाया। कहा कि आमतौर पर तीन महीने में जीएसटी ऑडिट हो जाना चाहिए लेकिन छह-छह महीने तक प्रक्रिया चलती रहती है। बिजनेसमैन को बार-बार बुलाया जाता है, जिससे वह परेशान होता है।