केंद्र सरकार के डीजल पर सेस लगाने से कर्ज तले डूबे हरियाणा के किसानों पर और आर्थिक बोझ पड़ेगा। प्रदेश के साढ़े सोलह लाख किसानों की कमर डीजल महंगा होने से टूटना तय है। चूंकि, हरियाणा के 22.50 लाख किसान पहले से 7707 करोड़ के कर्ज तले दबे हैं। कर्ज तले दबे किसानों की संख्या इसलिए 22.50 लाख बनती हैं, क्योंकि साढ़े सोलह लाख किसान एक से अधिक बैंक के कर्जदार हैं।
डीजल पर सेस लगने से कीमतों में इजाफा होगा, जिसका सीधा असर किसान पर पड़ेगा। फसल तैयार करने पर आने वाली लागत में बढ़ोतरी होगी। अभी एक सीजन में एक एकड़ जमीन पर फसल तैयार करने के लिए 35 से 50 लीटर डीजल खर्च होता है। इसके बाद फसल बिक्री के लिए भी ट्रैक्टर-ट्राली में ही मंडी तक ले जाई जाती है। जिसमें भी डीजल की खपत होती है।
डीजल की कीमतें बढ़ने से डीजल पर खर्च होने वाली राशि और बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर किसान की जेब पर पड़ेगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य पहले ही किसान की इच्छानुसार नहीं बढ़ा है। इससे किसानों में पहले से नाराजगी है जोकि डीजल पर सेस लगने से और बढ़ गई है।