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यूजीसी चाहती है छात्रों को सीधे प्रमोट किया जाए, पीयू एग्जाम कराने पर तुला

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चंडीगढ़। कोरोना का प्रसार पूरे देश में तेजी के साथ हो रहा है। इससे सबसे अधिक शिक्षा क्षेत्र प्रभावित है। खतरा लगातार बढ़ता देख यूजीसी ने निर्णय लिया है कि सभी स्टूडेंट्स को बिना एग्जाम के प्रमोट कर दिया जाए, लेकिन पंजाब यूनिवर्सिटी विद्यार्थियों की परीक्षा कराने की रट लगाए हुए है। उसी का खाका तैयार किया जा रहा है। छात्र संगठनों ने पंजाब यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा है कि यूजीसी की गाइडलाइन का पालन किया जाए ताकि छात्रों को राहत मिल सके।
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विश्वविद्यालयों की सेमेस्टर परीक्षाएं मई माह में शुरू होती थी, लेकिन इस बार कोरोना के कारण नहीं हो सकी। लगातार कोरोना बढ़ता गया और परीक्षाओं का प्रस्ताव भी आगे बढ़ता गया। यूजीसी ने एक कमेटी बनाई। उस कमेटी ने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय चाहे तो स्टूडेंट्स को पिछले प्रदर्शन के आधार पर प्रमोट कर सकते हैं। यूजीसी की पहली गाइडलाइन के मुताबिक कई विश्वविद्यालयों और आईआईटी संस्थानों ने विद्यार्थियों को प्रमोट करने की योजना बनाई और उस पर मुहर भी लगा दी, लेकिन पीयू ने घोषणा कर दी कि वह परीक्षाएं करवाएगा। जुलाई में परीक्षा कराने का कार्यक्रम तय हो गया। रीजनल सेंटर के स्टूडेंट्स से प्रस्ताव भी मांग लिया गया कि वह किस केंद्र पर पंजाब में परीक्षा देना चाहेंगे।
इस प्रकरण को छात्र संगठनों ने प्रमुखता से उठाया। उन्होंने छात्रों के सामने आने वाली समस्याओं को बताया। यह प्रकरण यूजीसी के उच्चाधिकारियों तक भी पहुंचा। उसके बाद यूजीसी ने इस पर समग्र प्लान तैयार किया और फिर एक कमेटी बना दी। यूजीसी ने कहा है कि स्टूडेंट्स के एग्जाम न लिए जाएं, फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स को भी राहत दी जा सकती है। उन्हें पिछले प्रदर्शन के आधार पर अगली कक्षाओं में प्रमोट किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर उनकी परीक्षाएं कोरोना के बाद भी हो सकती हैं यदि उन्हें कम अंक मिलते हैं तो। इसके लिए स्टूडेंट्स को खुद डिमांड करनी होगी।
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यूजीसी की गाइड लाइन का पालन हो : निखिल नरमेटा
सूत्रों का कहना है कि पंजाब यूनिवर्सिटी एग्जाम कराने की रट लगाए हुए है। वह एग्जाम कराकर ही दम लेगी। वहीं दूसरी ओर स्टूडेंट्स भी अपने मुद्दे से नहीं हट रहे हैं। उन्होंने भी अधिकारियों को पत्र लिखा है। एनएसयूआई के अध्यक्ष निखिल नरमेटा ने कहा कि यूनिवर्सिटी को फाइनल ईयर की परीक्षाएं नहीं करानी चाहिए। यूजीसी की गाइडलाइन का पालन करना चाहिए। इनके अलावा आइसा, सोई आदि छात्र संगठनों ने भी छात्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है।
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