Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
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पंजाब यूनिवर्सिटी की बिगड़ती आर्थिक दशा को लेकर हाईकोर्ट की ओर से लिए गए स्वयं संज्ञान मामले में सुनवाई के दौरान ग्रांट जारी करने पर जवाब न देना यूजीसी सचिव को भारी पड़ा। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केस की अगली सुनवाई पर यूजीसी के सचिव को ग्रांट के बारे में पूरा ब्यौरा लेकर हाजिर होने के आदेश दिए हैं।
पिछली सुनवाई पर केंद्र सरकार ने मामले से खुद को अलग करते हुए कहा था कि यूनिवर्सिटी को ग्रांट यूजीसी जारी करती है। ऐसे में यूजीसी ही पीयू की ग्रांट पर जवाब दे सकता है। इस पर हाईकोर्ट ने यूजीसी से जवाब मांगा था। यूजीसी ने बताया था कि इस वित्तीय वर्ष में पीयू को 90 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं। अब लंबित राशि 90 करोड़ ही है, जिस पर 15 नवंबर को चर्चा होनी है।
हाईकोर्ट ने बैठक में लिए गए निर्णय की यूजीसी से जानकारी मांगी थी। सोमवार को सुनवाई आरंभ होते ही हाईकोर्ट ने यूजीसी से जवाब मांगा। यूजीसी कोई जवाब नहीं दे पाया तो हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए यूजीसी को कड़ी फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश दिए हैं कि पांच दिसंबर को यूजीसी के चेयरमैन या सचिव खुद हाईकोर्ट में पेश हो बताएं कि पीयू को ग्रांट की राशि कब जारी की जाएगी।