एक अदालत से दूसरी अदालत में अटकती रही फिल्म उड़ता पंजाब के शुक्रवार को देश भर में रिलीज किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। वीरवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट स्वीकार करते हुए इस फिल्म पर रोक लगाए जाने की मांग वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। जस्टिस एम. जयपॉल ने मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि ड्रग की समस्या केवल पंजाब में ही नहीं, बल्कि पूरे देश की बन चुकी है।
उन्होंने एमिकस क्यूरी एडवोकेट सुजॉय कांटावाला की ओर से कोर्ट में पेश की गई चार पन्नों की रिपोर्ट के आधार पर कहा कि फिल्म में पंजाब और पंजाबियों के बारे में गलत संवाद या संदेश की बात निराधार है। एडवोकेट वतन शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर फिल्म उड़ता पंजाब पर रोक लगाए जाने की मांग की थी। याची का कहना था कि फिल्म में पंजाब और पंजाबियों की छवि को धूमिल किया गया है।
फिल्म के जरिये पूरे विश्व में पंजाबियों के प्रति गलत संदेश जाएगा। वतन शर्मा के अलावा पंजाब महिला आयोग ने भी एक याचिका दायर कर फिल्म पर रोक लगाने की मांग की थी। आयोग की याचिका में कहा गया था कि फिल्म में पंजाब की महिलाओं को गलत ढंग से पेश किया गया है, जोकि पंजाब की संस्कृति के विपरीत और पंजाबी महिलाओं की छवि खराब करने वाला है।
फिल्म में पंजाबी महिलाओं के खिलाफ कुछ भी नहीं
उड़ता पंजाब
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वीरवार को इन याचिकाओं पर सुनवाई के मौके पर महिला आयोग के वकील की ओर से मामला उठाए जाने पर एमिकस क्यूरी ने कहा कि उन्होंने फिल्म देखी है। फिल्म में पंजाबी महिलाओं के खिलाफ कुछ भी नहीं है। कोर्ट में मौजूद फिल्म उड़ता पंजाब की निर्माता कंपनी फेंटम फिल्म्स प्रा. लि. के वकील संजय कौशल ने दोनों याचिकाकर्ता की आपत्तियों को गलत ठहराते हुए कहा कि वे खुद भी जन्म से पंजाबी हैं और पंजाब में ही रहते हैं।
इस फिल्म के खिलाफ केवल दुष्प्रचार किया जा रहा है। इससे पहले मामले में हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त एमिकस क्यूरी एडवोकेट सुजॉय कांटावाला ने कोर्ट के निर्देश पर ही गत मंगलवार को मुंबई में सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) के सिनेमाहाल में उक्त याचिकाकर्ताओं और अन्य प्रतिवादियों के साथ यह फिल्म देखी और उसके आधार पर वीरवार को अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंप दी।
रिपोर्ट में एडवोकेट कांटावाला ने कहा कि इस फिल्म को ए सर्टिफिकेट के साथ पास किया गया है। इसलिए वयस्क दर्शक ही इस फिल्म को देखेंगे। वे फिल्म में ड्रग के खिलाफ दिए संदेश को आसानी से समझ सकते हैं। उन्होंने बताया की यह फिल्म समाज को आइना दिखने का काम करेगी।
फिल्म में अभद्र भाषा के प्रयोग से बचा जा सकता था
हालांकि एमिकस क्यूरी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि फिल्म में अभद्र भाषा और पंजाबी गालियों का प्रयोग किया गया है, जिससे बचा जा सकता था। उन्होंने बताया कि मुंबई हाईकोर्ट ने इस फिल्म को एक कट और ए सर्टिफिकेट के साथ पास कर दिया है।
फिल्म पूरे भारत में कहीं भी दिखाई जा सकती है
उड़ता पंजाब
एडवोकेट सुजॉय कांटावाला की ओर से हाईकोर्ट में पेश की गई चार पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है कि फिल्म उड़ता पंजाब की केंद्रीय थीम पंजाब में ड्रग की समस्या है। फिल्म पूरे भारत में कहीं भी दिखाई जा सकती है, क्योंकि ड्रग की समस्या महज पंजाब तक सीमित नहीं है। इस समस्या से पूरा देश जूझ रहा है। फिल्म का विषय देश के हर नागरिक के लिए महत्वपूर्ण है, चाहे वह पंजाब का निवासी हो या किसी अन्य प्रदेश का।
फिल्म को ध्यानपूर्वक देखने के बाद, उनके विचार से यह फिल्म किसी भी तरह से ड्रग या नारकोटिक के इस्तेमाल को या ऐसी किसी अवधारणा को या किसी व्यक्ति अथवा समूह को नशे के प्रति लुभाती हुई दिखाई नहीं देती। फिल्म न तो ड्रग के इस्तेमाल का समर्थन करती है और न ही नशा करने वाले किसी व्यक्ति का गुणगान करती है। यहां तक कि फिल्म के मुख्य किरदार शाहिद कपूर जोकि नशे का आदी है, लगातार गलतियों पर गलतियां करता है।
बाद में उसे एहसास होता है कि ड्रग खतरनाक है। यह जीवन में प्रेम भी गंवा सकता है। फिल्म में एक सब-इंस्पेक्टर, जिसका छोटा भाई तरल ड्रग का आदी है ड्रग्स के बुरे प्रभाव को देखने के बाद नशे की समस्या को उजागर करने का काम करता है। करीना कपूर खान एक डाक्टर है। उसका मिशन नशेडियों का पुनरुत्थान है। दुर्भाग्यवश, सब इंस्पेक्टर का छोटा भाई इलाज के दौरान नशा न मिलने के कारण आपा खोकर डाक्टर की हत्या कर देता है।
आलिया भट्ट जोकि किसान मजदूर है, ऐसी समस्याओं में घिरती है जो मानवीय स्वभाव में छिपी कालिख को उजागर करता है। यह फिल्म ड्रग और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले विभिन्न तरह के नुकसान का चित्रण करती है। निष्कर्ष रूप में फिल्म ड्रग की समस्या से होने वाले नुकसान और इस समस्या के समाधान की ओर इशारा करती है।