सेंसर बोर्ड द्वारा ‘उड़ता पंजाब’ को पब्लिक स्क्रीनिंग के लिए स्वीकृति नहीं दिये जाने की आलोचना करते दिग्ग्जों ने तीखी बातें कहीं। आप के वरिष्ठ नेता और पंजाबी फिल्म कलाकार गुरप्रीत सिंह घुग्गी ने कहा कि राजनीतिक कारणों के चलते फिल्म रिलीज नहीं करने के लिए बहाने बनाए जा रहे हैं। बोर्ड अधिकारी कह रहे हैं कि फिल्म में अश्लील शब्दावली का उपयोग होने के कारण उसे रिलीज नहीं किया गया, जबकि इसके पीछे असली वजह राजनीति है।
घुग्गी ने कहा कि उड़ता पंजाब फिल्म में पंजाब में नशे की समस्या को दर्शाया गया है। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह पहले ही पंजाब में सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल ने फिल्म में पंजाबियों के चित्रण के बारे में ब्यान दिया था। घुग्गी ने कहा कि शिअद केंद्र में भाजपा शासित नरेंद्र मोदी सरकार की सहयोगी है इसलिए उन्होंने इस फिल्म पर प्रतिबंध लगाने के लिए अपने प्रभाव का उपयोग किया। जबकि फिल्म के निर्देशक अभिषेक चौबे इस फिल्म को ए सर्टिफिकेट के साथ भी प्रदर्शित करने को तैयार हैं।
कैप्टन ने की उड़ता पंजाब फिल्म पर रोक की निंदा
प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सेंट्रल बोर्ड फॉर फिल्म सर्टिफिकेशन की ओर से हिंदी फिल्म उड़ता पंजाब पर रोक लगाए जाने की निंदा की है। उन्होंने इसे अकाली-भाजपा सरकार के इशारे पर उठाया कदम बताया है। उन्होंने कहा कि इस फिल्म पर रोक साफ तौर पर अपनी गलतियां छिपाने की मंशा से लगाई गई है।
कैप्टन ने कहा कि वित्त मंत्री अरुण जेटली सूचना व प्रसारण मंत्री भी हैं और सेंसर बोर्ड को नियंत्रित करते हैं। वह पंजाब की कड़वी व दुखद सच्चाई पेश करने वाली फिल्म पर रोक केतानाशाही फैसले में बराबर के हिस्सेदार हैं।
कैप्टन ने कहा कि अगर अकाली-भाजपा सरकार यह समझती है कि फिल्म पर रोक लगाकर पंजाब में नशों के जह की गंभीर असलियत से बच सकते हैं और दुनिया से सच छिपा लेंगे, तो यह उनकी गलती है। जेटली को इस रोक के खिलाफ खड़ा होना चाहिए था, क्योंकि पंजाब में नशों की गंभीरता को उनसे ज्यादा कौन जान सकता है। कैप्टन ने फिल्म के निर्माताओं की ऐसे मुश्किल विषय चुनने और पंजाब का दर्द पेश करने के लिए प्रशंसा की।