कोराना से बरसों से चली आ रही परंपरा को भी तोड़ दिया। हर बार नए सैन्य अधिकारियों की वर्दी पर उनके परिजन रैंक पैड लगाते हैं। लेकिन इस बार परिजन और रिश्तेदार इस समागम में शामिल नहीं हो पाए। आईएमए ने परिजनों तक पासिंग आउट परेड का प्रसारण सोशल मीडिया के जरिए पहुंचाया। कोरोना संक्रमण के चलते इस बार अपनी यूनिट्स ज्वाइन करने से पहले इन नए अधिकारियों को अवकाश भी नहीं मिल पाएगा।
रैंक पैड नहीं लगा पाए तो क्या... भरपूर खुशी मिली है: परिजन
अपने सपूत के कंधों पर रैंक पैड लगा उन्हें सेना में अधिकारी के तौर पर शामिल होते देखना गर्व का क्षण होता है। लेकिन कोरोना के चलते इस बार ऐसा नहीं हुआ। हमारे लिए यही गर्व की बात है कि सेना के भावी अधिकारियों की स्वास्थ्य व सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया। यह कहना है ले. सहगुरबाज सिंह की मां हरजोत कौर का।
हरजोत कौर हुडको में ज्वाइंट जनरल मैनेजर हैं और पिता बलविंदर सिंह टेलीकॉम डिपार्टमेंट में डिप्टी डायरेक्टर जनरल हैं। उनकी बहन जपजी मेहरा डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस में साइंटिस्ट हैं। जपजी भी अपने भाई की कामयाबी से खुश हैं। हरजोत कौर बताती हैं कि हमने लाइव पासिंग आउट परेड देखी। अपने बेटे के सपनों को पूरा होते देख माता-पिता गर्व महसूस कर रहे हैं।
2011 में शुरू हुआ था इंस्टीट्यूट
वर्ष 2011 में महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्स प्रिपेटरी इंस्टीट्यूट की शुरूआत हुई थी। जिसका पहला बैच वर्ष 2013 में पास आउट हुआ। पंजाब सरकार ने इसकी स्थापना इसलिए की थी कि पंजाब के ज्यादा से ज्यादा नौजवान सही ट्रेनिंग लेकर एनडीए में दाखिल हो सकें और भारतीय सेना में अधिकारी बनें।
अभी तक यहां से 137 स्टूडेंट्स एनडीए में दाखिल हो चुके हैं, जिनमें से शुरूआती 4 बैच के 63 स्टूडेंट्स भारतीय सेना में बतौर अधिकारी शामिल हैं। यह जानकारी देते हुए इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर रिटा. मेजर जनरल जीएस ग्रेवाल ने चारों अधिकारियों के उज्जवल भविष्य की कामना की।