रीनल ट्रांसप्लांट के प्रमुख डॉ. आशीष शर्मा ने बताया कि दूसरा बच्चा रोपड़ (रूपनगर) निवासी 13 साल का अमनदीप था, जिसे हिमोफीलिया नामक बीमारी थी। 16 जुलाई को उसे गंभीर स्थिति में पीजीआई में भर्ती किया गया था। इलाज के दौरान 22 जुलाई को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। पिता प्रताप सिंह की अनुमति के बाद उसकी दोनों किडनी पीजीआई में भर्ती किडनी के मरीजों को प्रत्यारोपित कर दी गई हैं।
प्रताप सिंह का कहना है कि उनका बेटा हिमोफीलिया जैसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त होने के बावजूद रक्तदान से मिलने वाले खून के बल पर जिंदा था, इसलिए उन्होंने उसका अंगदान कर दान की अवधारणा को कायम रखने में सहयोग किया।
लॉकडाउन से अब तक हुए 9 ट्रांसप्लांट
रोटो के नोडल ऑफिसर डॉ. विपिन कौशल ने बताया कि कोरोना की वजह से लॉकडाउन के बाद से अब तक पीजीआई में 9 ऑर्गन ट्रांसप्लांट किया जा चुका है। इनमें से 8 लोगों को किडनी ट्रांसप्लांट की गई है, जबकि एक मरीज को हार्ट प्रत्यारोपित किया गया है। पीजीआई में यह 6वां हार्ट ट्रांसप्लांट है। डॉ. कौशल ने बताया कि करोना के दौरान संक्रमण से बचाव के सारे मानकों का पालन करते हुए अंगदान की प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों को अंग प्रत्यारोपित कर जीवन दान देने का प्रयास किया गया है, जो सफल भी रहा है।