पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा और भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने रविवार को बिना किसी का नाम लिए आरोप लगाया कि इस समय पार्टी (भाजपा) और देश की सरकार को केवल दो नेता कठपुतली की तरह चला रहे हैं। इन दोनों के आगे पार्टी के सभी नेता नेता नतमस्तक हैं।सब स्तुति में जुटे हैं जबकि मैं जो कुछ गलत हो रहा है, उसके खिलाफ खुलकर बोल रहा हूं।
शत्रुघ्न सिन्हा ने आरोप लगाया कि पार्टी में आंतरिक प्रजातंत्र पूरी तरह समाप्त हो गया है जो कभी अटलबिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के समय में हुआ करता था। उन्होंने यहां तक कह डाला कि पार्टी ‘वन मैन शो’ और ‘टू मैन आर्मी’ बन चुकी है। उन्होंने कहा कि वह खुद भाजपा नहीं छोड़ेंगे। पार्टी चाहे तो उन्हें बेशक निकाल सकती है।
पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में जो-जो वायदे किए थे, वे सभी जुमले साबित हो रहे हैं इस बात को लेकर लोगों में निराशा है। ऐसे में 2019 का आम चुनाव भाजपा के लिए आसान नहीं होगा। आरोप लगाया कि कर्नाटक में भाजपा ने बहुमत साबित करने के लिए संविधान तक की परवाह नहीं की और दूसरे दलों के विधायकों के जोड़-तोड़ में जुटी थी।
उन्होंने कहा कि भाजपा अब वह पार्टी नहीं रह गई है जो कि पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के समय में थी। पाकिस्तान के मुद्दे पर भी मोदी की हर पालिसी फेल हो रही है। पाकिस्तान ने पठानकोट मामले में भी पीएम मोदी को बेवकूफ बनाया। पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा और सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन को भाजपा नहीं छोड़ने की सलाह दी जबकि धवन पार्टी छोड़ने के लिए तैयार थे। दोनों नेताओं ने उन्हें पार्टी में ही रहकर शहरवासियों की समस्याएं उठाने की सलाह दी।
‘देश के हालात इमजेंसी जैसे हो गए हैं। 70 वर्षों के इतिहास में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम जजों को प्रेस कांफ्रेंस करनी पड़ी। लोकसभा का सत्र छोटा किया जा रहा है। विरोध करने वालों को किनारे लगाया जा रहा है। सीबीआई और ईडी का दुरुपयोग किया जा रहा है। सत्ता के लिए भाजपा किसी भी हद तक जाने को तैयार है। मैंने तो शत्रुघ्न सिन्हा को जेल जाने तक के लिए तैयार कर लिया है।’ यशवंत सिन्हा, पूर्व वित्त मंत्री
अगर सच कहना बगावत है तो मैं बागी हूं। व्यक्ति से बड़ी पार्टी है और पार्टी से बड़ा राष्ट्र है। मैं ताली का पात्र हूं गाली का नहीं। सही दिशा की ओर बढ़ो, बदनाम के साथ नहीं। यह सब बात दिल की बात कर रहा हूं। मन की बात तो किसी और की पेटेंट हो गई है। एक वर्ष में 365 दिन होते हैं लेकिन जीएसटी में अब तक 357 संशोधन हो चुके हैं। न खाऊंगा, न खाने दूंगा का नारा देने वाले आज कर्नाटक में विधायकों की खरीद-बिक्री की दुकान लगाकर बैठे थे। अंत में क्या हुआ, बदनामी ही हुई।- शत्रुघ्न सिन्हा