20 और 21 अक्तूबर को बुलाया गया पंजाब विधानसभा का दो दिवसीय सत्र हंगामेदार रहने के आसार हैं। सरकार ने इस सत्र का आयोजन आवश्यक विधायी कामकाज के उद्देश्य से किया है। मगर विपक्षी दलों ने एसवाईएल और नशे के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी की है। इन दो प्रमुख मुद्दों के अलावा मुख्यमंत्री द्वारा प्रमुख विपक्षी नेताओं को एक नवंबर को खुली बहस का न्योता देने पर भी सदन में हंगामा होना तय है, क्योंकि विपक्षी दल मुख्यमंत्री के न्योते को अलग-अलग शर्तों के साथ खारिज कर चुके हैं।
इस तरह, सदन में राज्य सरकार को जहां विपक्षी के आरोपों का सामना करना होगा, वहीं इस सत्र के आयोजन पर राज्यपाल के प्रश्नचिह्न भी सरकार की मुश्किल बढ़ाएंगे। राज्यपाल ने इस दो दिवसीय सत्र को गैरकानूनी ठहराते हुए कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर साफ कर दिया है कि दो दिन का यह सत्र पूरी तरह ‘शून्य’ है। इस दौरान किए जाने वाले कामकाज की कोई वैधानिक मान्यता नहीं होगी। वैसे, राज्य सरकार द्वारा राज्यपाल के दावे को खारिज करते हुए दो दिवसीय सत्र को सही ठहराया गया है।
फिलहाल इस सत्र के दौरान सरकार द्वारा सदन में पेश किए जाने वाले बिलों और प्रस्तावों की रूपरेखा विधानसभा सचिव को नहीं सौंपी गई है लेकिन बड़ी समस्या यह भी रहेगी कि सरकार द्वारा पारित किए जाने वाले प्रस्ताव एक बार फिर राज्यपाल के समक्ष पहुंचकर अटक सकते हैं, जैसा कि जून में बुलाए गए दो दिवसीय विस्तारित सत्र के दौरान पारित प्रस्तावों को अब तक राज्यपाल ने मंजूरी नहीं दी है।
बाजवा ने कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई
उधर, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने 19 अक्तूबर को कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई है। इसमें उक्त दो दिवसीय सत्र को लेकर रणनीति तय की जाएगी। वहीं, शिअद ने विधानसभा सत्र को लेकर राज्यपाल के फैसले का हवाला देते हुए इसका विरोध किया है लेकिन पार्टी किस रणनीति के साथ पहुंचेगी, इस संबंध में बुधवार को पार्टी प्रवक्ता ने कुछ भी बताने से इंकार किया है।