नौ पत्रों का जवाब दिया
गवर्नर के पत्रों का जवाब न देने के आरोप पर मान ने दावा किया कि उन्होंने सात पत्रों को छोड़कर बाकी सभी का जवाब दे दिया है। राज्यपाल ने उन्हें 16 पत्र लिखे, जिनमें से नौ का जवाब दिया गया है। राज्यपाल को पत्र लिखने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और तत्काल जवाब की उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए।
मणिपुर और हरियाणा में क्यों नहीं बोलते
मान ने कहा कि राज्यपाल पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाने की धमकी दे रहे हैं, जबकि मणिपुर और हरियाणा में उनके समकक्ष वहां कानून व्यवस्था की स्थिति पर चुप्पी साधे हुए हैं। मैं राज्यपाल साहब से पूछना चाहता हूं कि क्या हरियाणा के राज्यपाल ने नूंह में जो कुछ हुआ, सांप्रदायिक झड़पें और हिंसा हुई और कर्फ्यू लगाना पड़ा, उसके संबंध में हरियाणा के मुख्यमंत्री को कोई नोटिस जारी किया है? क्या हरियाणा के राज्यपाल ने कोई पत्र लिखा है? नहीं, क्योंकि उनकी सरकार केंद्र में भी शासन कर रही है।
उन्होंने कहा कि पंजाब के राज्यपाल पंजाब में कानून-व्यवस्था को लेकर चिंतित हैं, लेकिन जातीय हिंसा से जूझ रहे मणिपुर पर उन्होंने कभी कोई बयान नहीं दिया। मान ने पूछा कि क्या संविधान मणिपुर में लागू नहीं है? उत्तर प्रदेश में पत्रकारों के सामने एक हत्या हो जाती है, लेकिन क्या यूपी के राज्यपाल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए योगी आदित्यनाथ को कोई पत्र जारी करने की हिम्मत करेंगे। मान ने दावा किया कि पंजाब, दिल्ली, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को छोड़कर ज्यादातर लोग अपने राज्यपालों के नाम नहीं जानते होंगे, क्योंकि इन सभी पर गैर-भाजपा सरकारों का शासन है।