ट्यूबवेल कनेक्शन के दौरान बिजली निगम ही फाइव स्टार रैंक मोटर उपलब्ध करवाएगा। बिजली निगम के एक आला अफसर ने बताया कि हालांकि ट्यूबवेल पर मोटर लगवाना निगम का काम नहीं है। लेकिन जब फीडर चेकिंग हुई तो मालूम हुआ कि बहुत से किसानों ने ट्यूबवेलों पर मोटरें तो फोर रैंकिंग लगवा रखी थी, लेकिन बिल फर्जी रूप से फाइव स्टार रैंकिंग मोटर के बनवा रखे थे। जिससे बिजली की खपत काफी होती थी।
इस तरह करीब 250 साइट्स निगम ने चेक की थी। अब जो फाइव स्टार की मोटर ट्यूबवेल पर लगवाई जा रही है, वे नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कालीब्रेशन लेबोरट्रीज (एनएबीएल) से टेस्ट होकर आएगी और इस पर 5 साल की वारंटी भी होगी। मोटर खराब होने पर किसान को सिर्फ सूचना बिजली निगम को देनी होगी, मौके पर पहुंचकर एक्सपर्ट द्वारा मोटर की जांच की जाएगी।
जो मोटर लगवा चुके, उन किसानों को हो सकता है नुकसान
प्रदेश में कई किसान ऐसे भी हैं, जिन्होंने 40 से 60 फीट तक के छोटे स्तर के ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए आवेदन किया हुआ है। ऐसे किसानों ने बताया कि छोटे कनेक्शन के लिए उन्हें हजारों रुपये खर्च कर बोर टेस्ट भी करवाना पड़ता है। उनके आवेदन के बाद उनकी साइट का सर्वे भी हो गया है, नक्शे भी बन गए हैं, लगभग फाइल पूरी तैयार हो चुकी है।
उनके अनुसार बोरिंग टेस्ट के दौरान जहां जमीन में पानी की संभावना मिलती है, वहां तुरंत मोटर लगवानी पड़ती है, क्योंकि उस बोर को खाली नहीं छोड़ा जा सकता है। किसानों ने बताया कि इतना सबकुछ होने के बाद अब निगम कह रहा है कि मोटरें विभाग उपलब्ध करवाएगा। किसानों ने ऐसे मामलों में बिजली मंत्री से छूट देने की मांग की है।
इस पर बिजली मंत्री रणजीत सिंह का कहना है कि इस तरह के मामले उनके संज्ञान में आएं हैं, वे इस बारे में मुख्यमंत्री से ही बात कर कुछ कह पाएंगे। जबकि किसानों का कहना है कि उन्होंने अपने छोटे बोर में फाइव स्टार रैंक की मोटरें ही डलवाई है, चाहे तो निगम जांच कर सकता है, लेकिन यदि सारा काम नए सिरे से करना पड़ा, तो किसानों का काफी नुकसान हो जाएगा।