इंस्टीट्यूट आफ माइक्रोबायल टेक्नोलॉजी (इमटेक) ने न्यू टीबी वैक्सीन तैयार कर ली है। एनिमल ट्रायल में इसके बहुत अच्छे परिणाम आए हैं। अब इसके क्लीनिकल ट्रायल की तैयारी चल रही है। इसमें कम से कम तीन साल लग जाएंगे।
खास बात यह है कि इमटेक ने इस वैक्सीन को पेटेंट भी करा लिया है। इमटेक के डायरेक्टर डा. गिरीश साहनी ने दावा किया कि इसे बाजार में उतारने के लिए कंपनियों से बातचीत चल रही है। टीवी को जड़ से मिटाने में इस वैक्सीन की अहम भूमिका होगी।
उन्होंने बताया कि इस वैक्सीन का काम सीधे तौर पर इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाना होगा, ताकि टीबी को पैदा करने वाले कारक बेअसर हो जाएं।
राउंड टेबल कांफ्रेंस पर पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के सामने डा. गिरीश साहनी ने न्यू टीबी वैक्सीन का खुलासा किया। इस पर कलाम ने भी कहा कि टीबी की वैक्सीन भारत ही नहीं बल्कि विश्व के लिए अहम साबित होगी। उन्होंने पूरे इमटेक टीम को बधाई दी है।
वैक्सीन की कीमत बाजार में काफी सस्ती
इमटेक के मुताबिक इस वैक्सीन की कीमत बाजार में काफी सस्ती होगी। उन्होंने बताया कि इस वैक्सीन पर डा. जावेद एन अग्रेवाला व उनकी टीम काफी दिनों से काफी मेहनत से काम कर रही है।
टीम के मुताबिक मेमोरी बढ़ाने वाली कोशिकाओं की मदद से इस वैक्सीन को तैयार किया गया है। इससे साइटोकिन्स कहा जाता है। इसकी मदद से टीबी के केसों को रोकने में काफी मदद मिलेगी।
डा. साहनी ने बताया कि इंस्टीट्यूट में जब इतने बड़े वैज्ञानिक आ रहे हो तो इतनी बड़ी उपलब्धि के खुलासे का यही सही समय था।
साल 2013 में 5.5 लाख की मौत
इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेटरिक ईवॉल्यूशन (आईएचएमई) ऐट द यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन की एक स्टडी के मुताबिक वर्ष 2013 में टीबी से मरने वालों की कुल संख्या 5.5 लाख थी।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हर 90 सेकेंड में एक टीबी से ग्रसित एक व्यक्ति की मौत हो रही है। इससे बड़ी बात यह है कि मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट के केसों में बढ़ोतरी भी चिंताजनक है।
इसके तहत टीबी का इलाज बीच में छोड़ देने से उनमें दोगुने ताकत से टीबी हो जाती है, जो सबसे ज्यादा खतरनाक है।
ब्रेन स्ट्रोक व हार्ट अटैक के लिए बनाई थी दवा
इमटेक ने ब्रेन स्ट्रोक व हार्ट अटैक के लिए क्लाट बस्टर बनाया था। इसके अब तक दो फेज तैयार हो चुके हैं। तीसरे चरण के लिए क्लीनिक ट्रायल की मंजूरी भी मिल चुकी है। क्लाट बस्टर को डा. गिरीश साहनी ने तैयार किया था।
हार्ट अटैक व ब्रेन स्ट्रोक आने पर यदि क्लाट बस्टर का तुरंत इंजेक्शन दे दिया जाए तो इससे मरीज की जान बच जाती है। भारत में इसे बनाने से इसकी कीमत काफी कम है। क्लाट बस्टर बनने से अप्रत्यक्ष तौर पर 30 हजार करोड़ का फायदा देश को ही हुआ है।