पंजाब विधानसभा के बुधवार को शुरू हुए बजट सत्र के पहले दिन दिवंगतों को श्रद्धांजलि देने की परंपरा भी सियासत की चपेट में आ गई। शिअद ने सूबे के पूर्व डीजीपी केपीएस गिल को श्रद्धांजलि दिए जाने का विरोध करते हुए सदन से वाकआउट किया।
हालांकि इस मामले में उसके सहयोगी दल भाजपा के विधायक शांत बैठे रहे और उन्होंने गिल को श्रद्धांजलि दिए जाने का विरोध नहीं किया। दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल आम आदमी पार्टी (आप) के सदस्यों ने खड़े होकर गिल को श्रद्धांजलि देने का विरोध तो जताया, लेकिन सदन नहीं छोड़ा। फिर भी, आप के सहयोगी दल लोक इंसाफ पार्टी के बैंस भाइयों ने नारेबाजी करते हुए सदन से वाकआउट किया।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही स्पीकर राणा केपी ने विधानसभा के पिछले सत्र से अब तक की अवधि के दौरान दिवंगत हुए लोगों को श्रद्धांजलि देने की प्रक्रिया शुरू की। जैसे ही उन्होंने पूर्व डीजीपी केपीएस गिल को श्रद्धांजलि देने के लिए उनका जीवन वृतांत पढ़ना आरंभ किया, पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में शिअद के सदस्य खड़े हो गए। उन्होंने गिल को पंजाब में मानवाधिकारों के हनन को दोषी बताते हुए सदन में उन्हें श्रद्धांजलि देने का विरोध किया। इस दौरान नवजोत सिंह सिद्धू और ब्रह्म मोहिंद्रा समेत सत्तापक्ष के कई नेता भी खड़े हो गए और उन्होंने शिअद के रवैये का विरोध किया।