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पंजाब विस बजट सेशन शुरू, कई मुद्दों पर गरमाएगा सदन, GST खास आकर्षण

Wed, 14 Jun 2017 02:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब विधानसभा का बजट सेशन
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पंजाब विधानसभा का बजट सेशन बुधवार को शुरू हो गया। वहीं कई अहम मुद्दों पर सदन के गरमाने के आसार बने हुए हैं और जीएसटी खास आकर्षण है। बजट सेशन 14 जून से लेकर 23 जून तक चलेगा। पंजाब की कैप्टन सरकार 20 जून को अपना पहला आम बजट पेश करेगी।
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विपक्षी पार्टियों आम आदमी पार्टी और अकाली-बीजेपी गठबंधन किसानों के कर्ज माफी, किसानों की आत्महत्या, दलितों पर हो रहे हमले जैसे कई मुद्दों पर कैप्टन सरकार को घेरेगी, लेकिन उनका विरोध बेअसर साबित होने के आसार भी बन चुके हैं।

रेत खदानों की नीलामी में सूबे के सिंचाई एवं बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह की कथित संलिप्तता को मुख्य विपक्षी दल आम आदमी पार्टी (आप) ने मुद्दा बनाया तो शिअद-भाजपा गठबंधन ने इसे हाथोंहाथ लपक लिया। अब गठबंधन और आप, दोनों अपने-अपने तरीके से सरकार का विरोध करते हुए राणा गुरजीत के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
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इसके साथ ही, गठबंधन ने राज्य में दलित उत्पीड़न को मुद्दा बनाने के साथ-साथ कांग्रेस सरकार पर बदले की सियासत करने का आरोप भी लगाया है। दोनों विपक्षी धड़े सूबे में बेअदबी के मामलों को लेकर भी विधानसभा में सरकार को घेरेंगे।

आप का साथ नहीं देगा अकाली दल

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
जानकारी के अनुसार, विधानसभा में विरोध को लेकर दोनों विपक्षी धड़ों ने जो रणनीति बनाई है, वह एक-दूसरे से अलग दिखाई देगी। विधानसभा के पहले सत्र में भी आप ने कांग्रेस के साथ-साथ शिअद पर भी राजनीतिक हमले करने का कोई मौका नहीं छोड़ा था।

इस बार अगर आप की तरफ से कोई भी मुद्दा उठाया जाएगा तो शिअद उसमें साथ नहीं देगा। हालात यहां तक बेगानों वाले रहेंगे कि अगर आप किसी मुद्दे पर वाकआउट करेगी तो शिअद-भाजपा गठबंधन उनका साथ नहीं देगा और अगर गठबंधन किसी मुद्दे पर सदन से बाहर गया तो आप के विधायक उनका साथ नहीं देंगे।

जाहिर है, इस तरह विभाजित विपक्ष सत्तापक्ष के लिए कोई बड़ी सिरदर्दी पैदा नहीं कर सकेगा और इसी का नतीजा है कि कांग्रेस विपक्ष को विरोध को लेकर गंभीर नहीं है।

विपक्ष को बोलने का पूरा मौका देंगे

अमरिंदर सिंह - फोटो : SELF
विधानसभा स्पीकर राणा केपी का कहना है कि पहले की भांति ही इस सत्र में भी विपक्षी सदस्यों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर देंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष को किसी भी मुद्दे पर विरोध जताने का पूरा हक है, लेकिन कुछ भी बोलते समय या अपने आचरण में सदन की मर्यादा और गरिमा को बनाए रखें।

उन्होंने कहा कि पिछला सत्र काफी कम समयावधि का था, लेकिन इस बार विपक्ष के सभी सदस्यों को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी इस बात के पक्षधर हैं कि सभी सदस्यों को हरसंभव तरीके से सदन में अपनी बात रखने के लिए समय मिलना चाहिए। इसलिए वे इसे सुनिश्चित बनाएंगे।

बजट सत्र में पेश किया जाएगा जीएसटी बिल

कैप्टन अमरिंदर सिंह
पंजाब कैबिनेट ने बजट सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स बिल के प्रारूप को हरी झंडी दे दी है। साथ ही राज्यपाल को पेश की जाने वाली पांच वित्त आयोग की रिपोर्ट को भी मंजूरी दी है।

जीएसटी काउंसिल की ओर से स्वीकृत व केंद्रीय कानून मंत्रालय के विधानक विभाग द्वारा एसजीएसटी संबंधी बिल के कानून का रूप लेने के बाद पंजाब म्यूनिसिपल फंड एक्ट और पंजाब म्यूनिसिपल बुनियादी ढांचा एक्ट को इसमें बदलने का रास्ता साफ हो जाएगा, इससे राजकीय कोष को प्रोत्साहन मिलेगा।

100 प्रतिशत वैट और पेट्रोलियम उत्पादों व शराब से एकत्र होने वाला अतिरिक्त टैक्स खजाने में जमा होगा। वहीं, वित्त आयोग की रिपोर्ट में 2016-17 से 2020-21 तक स्थानीय संस्थाओं को कुल राज्य टैक्सों का मौजूदा चार प्रतिशत हिस्सा जारी रखने की सिफारिश की गई है। अब ग्रामीण और शहरी संस्थाओं को अनुमानित 4364.40 करोड़ रुपये मिलेंगे।
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कैबिनेट ने आयोग की दूसरी सिफारिशें भी मानीं

कैप्टन अमरिंदर सिंह
कैबिनेट ने आयोग की दूसरी सिफारिशें भी मान ली हैं, जिनमें चुंगी के बदले अदायगी, बिजली पर चुंगी लगाने से आमदन, आबकारी करों और बोली राशि, शराब पर टैक्स, राज्य के करों में शहरी स्थानीय संस्थाएं, शहरी संस्थाओं में आपसी वितरण और पंचायती राज संस्थाओं में आपसी वितरण जैसे संशोधन शामिल हैं।

आयोग की कुछ सिफारिशों पर संबंधित प्रशासकीय विभागों द्वारा जायजा लेने का फैसला किया गया। जिनमें केंद्रीय 14वें वित्त आयोग की ओर से निर्धारित शर्तें शामिल हैं। कैबिनेट ने पंजाब कृषि उत्पादन मार्केट एक्ट में संशोधन द्वारा नामजद मार्केट कमेटियों को भंग करके प्रशासनिक अधिकारी लगाने से संबंधित ड्राफ्ट बिल पेश करने को मंजूरी दी। इसी एक्ट में एक और संशोधन का ड्राफ्ट बिल भी सत्र में पेश करने को हरी झंडी दी गई।

ताकि केंद्र सरकार द्वारा बनाए मॉडल एक्ट के अनुसार मंडीकरण सुधार के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इसका मकसद कृषि उत्पादों के मंडीकरण में पारदर्शिता और कुशलता सुनिश्चित करना है। साथ ही किसानों की फसलों की अधिक कीमत सुनिश्चित करना भी है। यह कदम निजी कंपनियों और सरकारी मार्केट कमेटियों को बराबर अवसर मुहैया कराएगा।

 
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