पंजाब विधानसभा चुनाव के सियासी दंगल में इस बार आम आदमी पार्टी के शामिल होने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया और सियासी समीकरण बदल गए। अभी तक सूबे में कांग्रेस और अकाली-भाजपा के उम्मीदवार ही मजबूती से आमने-सामने होते थे, लेकिन इस बार तिकोने मुकाबले से तस्वीर दूसरी है।बीते लोकसभा चुनाव में मालवा से चार सीटें जीत कर संसद पहुंची ‘आप’ का पूरा ध्यान 69 विधानसभा सीटों वाले मालवा क्षेत्र पर है।
लोकसभा चुनाव में संगरूर से भगवंत मान, फरीदकोट से प्रो. साधू सिंह, फतेहगढ़ साहिब से हरेंद्र खालसा और पटियाला सीट डॉ. धर्मबीर गांधी ‘आप’ उम्मीदवार के तौर पर जीते थे। डॉ. गांधी और खालसा को ‘आप’ बर्खास्त कर चुकी है, जिसके बाद गांधी ने नया सियासी फ्रंट बनाया है और कुछ सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं। सुच्चा सिंह छोटेपुर ने 80 से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।
गांधी और छोटेपुर जितने वोट ले जाएंगे, नुकसान ‘आप’ के खाते में ही जाएगा। ‘आप’ की वजह से कांग्रेस, शिअद-भाजपा को कितना नुकसान होगा अभी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में मनप्रीत बादल ने तीसरा मोर्चा खोलने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी पार्टी पंजाब में खाता भी नहीं खोल सकी।