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पंजाब यूनिवर्सिटी की हरियाली पर छाया संकट, 80 साल पुराने पेड़ भी सूखे, 174 पेड़ काटने के आदेश

Thu, 19 Sep 2019 03:45 PM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी में सूखे पेड़ - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब विश्वविद्यालय की हरियाली संकट में है। यहां 80 से 100 साल पुराने पेड़ भी सूख गए हैं। पीयू प्रशासन ने 174 पेड़ों को काटने के आदेश दिए हैं। इसी के तहत वे चिह्नित किए गए हैं। जानकारों का कहना है कि सूखे पेड़ों की संख्या 250 से अधिक हैं, लेकिन सभी को चिह्नित नहीं किया गया। बताया जाता है कि दीमक ने तो पेड़ खोखले किए ही हैं, कुछ पेड़ों को केमिकल डालकर भी सुखाने का अंदेशा है। हालांकि यह जांच का विषय है।
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फिलहाल पीयू प्रशासन का तर्क है कि पेड़ों की उम्र पूरी हो गई थी। सबसे पहले गांधी भवन से लेकर लॉ विभाग तक पेड़ सूखे। इनकी संख्या दर्जनों में थी। उसके बाद यह पेड़ उसी कतार में सूखते गए। फैशन एंड टेक्नोलॉजी विभाग के पीछे पार्किंग में एक बड़े पेड़ का आधा तना गिरा हुआ है। इसी लाइन में कई और अशोक के पेड़ सूखे हैं। हॉस्टल नंबर चार के पीछे एक विशाल पेड़ सूखा हुआ है। बताया जाता है कि इसकी उम्र 80 साल से अधिक है। पेड़ का तना व टहनियां इतनी काली हो गईं कि पेड़ की प्रजाति भी नहीं पहचानी जा रही।

स्पोर्ट्स हॉस्टल वाली सड़क पर आधा दर्जन से अधिक पेड़ सूख गए हैं। यही सड़क जब आवासीय कालोनी की ओर जाती है तो बीच रास्ते में पेड़ को आधे तने के साथ काट दिया गया। आवासीय परिसर के अलावा हॉस्टल एरिया, प्रशासनिक कार्यालय आदि जगहों पर भी पेड़ सूख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इन पेड़ों के जब दीमक लगी तो उसका इलाज संभव था, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। दवाओं पर लाखों रुपये खर्च जरूर दिखाए गए।
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हजारों पेड़ों का जीवन संकट में

पीयू में चार हजार से अधिक पेड़ 200 से अधिक प्रजातियों के हैं। जानकारों के मुताबिक 80 फीसदी पेड़ों पर दीमक ने हमला बोल दिया है। इन पेड़ों की शाखाएं सूख रही हैं। कई पेड़ों के आधे तने खोखले हो गए हैं, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा। यहां हजारों पेड़ों का जीवन संकट में है। हाल ही में पीयू ने 25 हजार पौधे लगाने का दावा किया है। लोगों का तर्क है कि पहले स्थापित पेड़ों की सुरक्षा पीयू प्रशासन या उद्यान विभाग नहीं कर पा रहा तो फिर पेड़ लगाने का कोई औचित्य नहीं है।

ग्रीन बेल्ट से नहीं हटाईं ईंटें
पीयू की ग्रीन बेल्ट में पेड़ों के चारों ओर ईंटें हटाने के आदेश हुए थे, ताकि पेड़ों का विस्तार हो सके और वह खुलकर सांस ले सकें। इसके बावजूद एक साइड की ईंटें हटाई गईं, जबकि गांधी भवन की साइड की ईंटें नहीं हटाईं। वीसी प्रो. राजकुमार ने इसके आदेश भी दिए थे।

जानकारों का कहना है कि पेड़ों का जीवन संकट में इसलिए डाला जा रहा है कि उसके लिए विशेषज्ञों से राय नहीं ली जाती। विभाग जो चाहे कर रहा है। पैसे केवल खपाए जा रहे हैं। मालूम हो कि इस मामले को समाजशास्त्र विभाग के प्रो. विनोद कुमार चौधरी ने उठाया था। वे पेड़ों की जड़ों में डाले गए कंक्रीट को हटाने के लिए पीयू में धरने पर भी बैठे थे।
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बड़े पेड़ों पर दीमक का प्रभाव होता है कम

पीयू बॉटनी विभाग के प्रो. एएस अहलूवालिया कहते हैं कि पेड़ों पर दीमक लगी होने के कारण भी वे सूख सकते हैं, लेकिन यदि पेड़ों की उम्र 50 साल से अधिक है तो उन पर दीमक अधिक प्रभाव नहीं डालती। दीमक की क्वीन पेड़ों की जड़ों में होती है जब तक वह खत्म नहीं होगी तब तक वह बार-बार आती रहेगी। ऊपर दवा डालने से उस पर असर नहीं होता है। इसके लिए जड़ों को खोदकर ट्रीटमेंट करना चाहिए। कुछ शरारती तत्व 70 साल से अधिक उम्र के पेड़ों पर केमिकल या नमक डालकर भी सुखा सकते हैं।

दीमक के कारण 174 सूखे पेड़ों को काटा जाएगा। इन पेड़ों की उम्र पूरी हो गई है। किसी अन्य कारण से ये पेड़ नहीं सूखे हैं।
- अनिल ठाकुर, इंजीनियर, हॉर्टिकल्चर विभाग।
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