चंडीगढ़। आयुष मिशन के अंतर्गत शहर में होम्योपैथी और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के साथ ही अब यूनानी पद्धति को बढ़ावा देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए सेक्टर-37 में 20 बेड का अलग अस्पताल बनाया जाएगा, जहां सिर्फ यूनानी पद्धति से गंभीर बीमारियों का इलाज किया जाएगा। मरीजों को भर्ती करने की भी सुविधा होगी। 2018 के स्वीकृत प्रोजेक्ट पर इंजीनियरिंग विभाग ने काम शुरू कर दिया है। यह अस्पताल सेक्टर-37 स्थित आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी में बनाया जाएगा। वहां इंजीनियरिंग विभाग की टीम ने चिह्नित स्थान में नक्शे के अनुसार नपाई का काम शुरू कर दिया है। वहीं, इसे लेकर लगातार बैठक कर प्रगति जांची जा रही है।
यूनानी चिकित्सा पद्धति क्या है... आप भी जानें
यूनानी चिकित्सा पद्धति शरीर के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और बीमारियों का इलाज करने के लिए एक प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है। यह प्रणाली प्रकृति से जुड़ी है और इसमें प्राकृतिक पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। यूनानी चिकित्सा पद्धति में शरीर के चार द्रव्यों (रक्त, कफ, पीला पित्त, और काला पित्त) के संतुलन पर जोर दिया जाता है। यूनानी पद्धति हिप्पोक्रेटिक सिद्धांत पर आधारित है, जो यह मानता है कि अरकान (तत्व), अखलात (द्रव्य) और मिजाज (स्वभाव) का सही संतुलन शरीर और मन को स्वस्थ रखता है।
आयुर्वेदिक अस्पताल को उद्घाटन का इंतजार
बता दें कि शहर की जनता को आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सेक्टर- 34 में 50 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल बनकर तैयार है। जानकारी के अनुसार इस अस्पताल का उद्घाटन 2024 में ही होना था, लेकिन अब तक जनता को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। सूत्रों का कहना है कि बिना बिल्डिंग हैंडओवर किए ही वहां एलोपैथी की ओपीडी संचालित की जा रही है, जिसे लेकर आयुर्वेदिक चिकित्सकों में रोष है। उनका कहना है की एकमात्र अस्पताल उनकी चिकित्सा पद्धति से इलाज करने वाले मरीजों को भर्ती करने के लिए बनाया गया है। वहां भी एलोपैथी को कब्जा दिलाया जा रहा है जो पूरी तरह गलत है।