पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया और पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की ओर से वीरवार को जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि पंजाब में इलाज पर खर्च होने वाली राशि का 76.5 प्रतिशत हिस्सा लोग भरते हैं। जबकि बाकी हिस्सा सरकार देती है।
इसका मतलब यह है कि हेल्थ पर खर्च होने वाले हर चार रुपये में से एक रुपये सरकार खर्च करती है, जबकि तीन रुपये लोगों को भरने पड़ते हैं। इससे लोगों का इलाज पर खर्च बढ़ता जा रहा है। गरीबी रेखा से नीचे के लोगों के लिए इलाज करा पाना मुश्किल हो गया है। इससे कई मध्यवर्गीय परिवार गरीबी रेखा से नीचे आ रहे हैं।
हेल्थ पर राज्य की कुल जीडीपी का सिर्फ 4.2 प्रतिशत
रिपोर्ट के मुताबिक साल 2013-14 में राज्य सरकार ने हेल्थ पर कुल 13414 करोड़ रुपये खर्च किए, जो राज्य की कुल जीडीपी का मात्र 4.2 प्रतिशत है। पीजीआई के पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एचओडी प्रोफेसर राजेश कुमार ने बताया कि तमिलनाडु और केरल जैसे राज्य हेल्थ पर पंजाब के मुकाबले दो से तीन गुना बजट खर्च करते हैं। इससे उन प्रदेशों का हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर काफी बेहतर है। कई योजनाएं हैं, जिसका फायदा मरीजों को मिलता है।
रोगों की रोकथाम पर सिर्फ 6 प्रतिशत खर्च
रिपोर्ट के मुताबिक प्रीवेंटिव केयर यानी रोगों की रोकथाम के लिए सरकार हेल्थ बजट का सिर्फ छह प्रतिशत राशि खर्च करती है। जो काफी कम है। क्यूरेटिव केयर यानी उपचार पर 46 प्रतिशत और ओपीडी मरीजों पर 27 प्रतिशत राशि खर्च करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब में कैंसर और हेपेटाइटिस सी जैसी कई बीमारियां हैं। उनकी रोकथाम के लिए सरकार को प्रीवेंटिव केयर पर ज्यादा राशि खर्च करनी होगी।
पंजाब के कुल हेल्थ बजट पर कौन कितना खर्च करता है
डिपार्टमेंट करोड़ शेयर प्रतिव्यक्ति
केंद्र सरकार 429.46 3.20 155
राज्य सरकार 2052.67 15.30 963
लोकल बॉडी 66.16 0.49 24
सोशल इंश्योरेंस 274.66 2.05 99
टैक्स फाइनेंस इंश्योरेंस 2.18 0.02 1
परिवार 10270.32 76.56 3702
फर्म्स 261.60 1.95 94
नान प्राफिट 57.53 0.43 21
कुल हेल्थ 13414.38 100 5059
कोट
सरकार को हेल्थ पर खर्च राशि बढ़ानी होगी। सरकार को चाहिए कि वह सभी अस्पतालों में दवाइयां मुहैया करवाए और जांच की भी व्यवस्था हो। इससे अपने आप लोगों का खर्च कम हो जाएगा। क्योंकि ज्यादा रुपये दवाइयों और जांचों पर ही खर्च हो रहे हैं।
-प्रोफेसर राजेश कुमार, एचओडी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ पीजीआई।