अखिल भारतीय जाट आदर्श महासभा ने आरक्षण आंदोलन के दौरान मारे गए जाट युवाओं के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा और नौकरी देने की मांग की है। इसके साथ ही महासभा ने मारे गए युवाओं को शहीद का दर्जा देने की मांग भी की है। वीरवार को महासभा के प्रतिनिधियों ने चंडीगढ़ में कृषि मंत्री ओपी धनखड़, राज्य के मुख्य सचिव डीएस ढेसी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से अलग-अलग मुलाकात की और उनके समक्ष अपनी मांगें रखीं।
महासभा ने आंदोलन के दौरान हुई हिंसा व दुखद घटनाओं के मद्देनजर इस साल होली नहीं मनाने का एलान भी किया। महासभा के अध्यक्ष डॉ. पवनजीत बनवाला के नेतृत्व में जाट नेता सबसे पहले कृषि मंत्री धनखड़ से उनके आवास पर मिले। उसके बाद उन्होंने हरियाणा सचिवालय में मुख्य सचिव से बातचीत की। उन्होंने सचिवालय में ही मुख्यमंत्री खट्टर को एक ज्ञापन सौंपा।
डॉ. बनवाला और महासभा के प्रवक्ता सुरेंद्र नैन ने खुशी जताई कि जाट आरक्षण पर प्रदेश सरकार का रुख साफ है। सरकार ने जाट समुदाय को आरक्षण दिलाने का भरोसा दिलाया है। महासभा ने कहा कि केंद्र सरकार की ओबीसी सूची और राज्य में बीसी-बी श्रेणी में जाटों को रखा जाए। डॉ. पवनजीत ने बताया कि 27 मार्च को झज्जर के जहाजगढ़ में राज्य स्तरीय श्रद्धांजलि रैली का आयोजन किया जाएगा, जिसमें जाट शिरोमणि प्रबंधन कमेटी का गठन होगा।
इससे पहले 12 मार्च को नरवाना में बैठक होगी, जिसमें इस आयोजन की रणनीति बनेगी। उन्होंने बताया कि श्रद्धांजलि रैली में नौ राज्यों के जाट हिस्सा लेंगे। महासभा के प्रतिनिधिमंडल में छतर सिंह मोर, कृष श्योकंद सरपंच, जयवीर मान बल्ला, देव लोहाना, महिला विंग की प्रधान रीतू, किताब सिंह बनवाला, विकेंद्र चोपड़ा और महावीर मोर भी शामिल थे।