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ग्राउंड रिपोर्टः दिल्ली से पानीपत तक 'मौत का हाईवे', इन 113 जगह चूके तो जा सकती है जान

Sun, 21 Jul 2019 12:07 PM IST
ajay kumar अंकित चौहान, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
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राई में नेशनल हाईवे को खोदकर छोड़ दिया गया। - फोटो : अमर उजाला
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एनएचएआई और हाईवे निर्माण कंपनी के अधिकारियों की लापरवाही के कारण नेशनल हाईवे-44 पर जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। इस हाईवे को दिल्ली से पानीपत तक वाहन चालकों की सुविधा के लिए आठ लेन बनाने काम शुरू किया गया लेकिन निर्माण की गति धीमी होने की वजह से अब यह खतरनाक हो गया है।

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दिल्ली के सिंधु बॉर्डर से पानीपत के सिवाह गांव तक इस हाईवे को खोदकर छोड़ दिया गया है। दिल्ली से पानीपत तक 70.5 किमी की दूरी में 113 जगहें ऐसी हैं, जहां वाहन चालकों की जान जाने का ज्यादा डर रहता है। हाईवे के बीच में 10 फुट तक गहरे गड्ढे हैं।

किनारों पर तालाब बने हुए हैं। ऐसे में इस पर बारिश में सफर करना जोखिम भरा हो गया है। जिन जगहों पर फ्लाईओवर बनाए जाने हैं, वहां ट्रैफिक वन-वे होने के कारण आए दिन घंटों जाम लगता है। इस वजह से 70.5 किमी के सफर में 6 घंटे तक लग जाते हैं।

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कुंडली में भी यही हाल - फोटो : अमर उजाला
नेशनल हाईवे-44 पर वाहनों का भार बढ़ता ही जा रहा है। इस राजमार्ग से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात समेत अन्य राज्यों के रोजाना तकरीबन 1.5 लाख वाहन गुजरते हैं। इनसे टोल टैक्स वसूलने के लिए दिल्ली से पानीपत के बीच मुरथल में टोल प्लाजा लगाया गया है। 

वाहन चालकों से हर महीने 20 करोड़ रुपये से ज्यादा का टोल टैक्स वसूला जाता है। इसके बावजूद हाईवे पर कोई सुविधा नहीं है। सड़क के बीच और किनारों पर गहरे गड्ढे होने से जो वाहन आगे निकालने की कोशिश करते हैं वह गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। सड़क की खुदाई करके छोड़ने से किनारों से मिट्टी कटकर गड्ढों में जाने लगी है। इससे वाहन चलाने में खतरा बढ़ गया है। बारिश में हालात ज्यादा खराब हो गए हैं। 

कंपनी को निर्माण का ठेका दे भूल गए एचएचएआई के अधिकारी
नेशनल हाईवे-44 की मुख्य सड़क को छह लेन से आठ लेन बनाने के साथ ही दोनों ओर दो-दो लेन की सर्विस रोड बनवाने के लिए एनएचएआई ने वर्ष 2015 में पीएम नरेंद्र मोदी से शिलान्यास कराया था। एनएचएआई के अधिकारियों ने शिलान्यास के बाद मेसर्स मुकरबा चौक पानीपत टोल रोड लिमिटेड कंपनी को निर्माण का जिम्मा तो दिया लेकिन फिर इसकी सुध नहीं ली। 

- फोटो : अमर उजाला
कंपनी बिल्ड ऑपरेशन एंड ट्रांसफर मोड (बीओटी) के आधार पर 2178.72 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इस कारण निर्माण अवधि से लेकर 17 साल तक कंपनी टोल टैक्स वसूलेगी। अभी तक छह लेन का टोल वसूला जा रहा है, जो सरकार के पास जा रहा है। हाईवे निर्माण की सुध नहीं लेने के कारण ही अभी तक काम केवल 30 प्रतिशत ही हो सका है।

यहां फ्लाईओवर अधूरे होने से हालात ज्यादा खराब
-कुंडली में रसोई गांव के पास
-राई औद्योगिक क्षेत्र के सामने
-राई गांव के सामने
-सेक्टर 7 डिवाइडर रोड के सामने वर्धमान चौक
-नांगल खुर्द गांव के सामने
-गोहाना बाईपास के सामने
-हसनपुर गांव के सामने
-भिगान चौक
-बड़ी औद्योगिक क्षेत्र के सामने
-गढ़ी कलां के पास
-निरंकारी भवन के सामने
-पट्टी कल्याणा गांव के पास
-मनाना कालेज के पास
-करहस गांव के पास
-मछरौली गांव के पास
-जटीपुर गांव के पास
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नेशनल हाईवे का निर्माण करने वाली कंपनी को कुछ फाइनेंसियल परेशानी हो गई थी, जिससे कुछ समय के लिए निर्माण कार्य बंद हो गया था। इस वजह से निर्माण कार्य में देरी हो गई है। पिछली कमियों को दूर करके जल्द से जल्द निर्माण कराया जा रहा है। - आनंद कुमार, टेक्निकल मैनेजर एनएचएआई

नेशनल हाईवे का निर्माण शुरू किया था तो इसमें काफी समस्याएं आ रही थीं। फंडिंग की परेशानी भी शुरू में आई तो उसके बाद पेड़ काटने व बिजली के खंभे हटाने को लेकर भी समस्याएं रहीं। इन कारणों से निर्माण कार्य में देरी हुई। अब सभी समस्याएं दूर हो गई हैं। कंपनी सबसे पहले दिल्ली के सिंधु बॉर्डर से पानीपत तक के हिस्से को पूरा करेगी। - प्रदीप गोयल, सीईओ मेसर्स मुकरबा चौक पानीपत टोल रोड लिमिटेड कंपनी
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