वैश्विक महामारी कोरोना के चलते सबसे अधिक ध्यान इम्युनिटी बढ़ाने पर दिया जा रहा है। योग आदि के जरिए तो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ ही रही है। लेकिन योग के साथ खाने के लिए ऐसा अनाज चाहिए जो इम्युनिटी को कई गुना बढ़ा दे। रोग आदि शरीर के आसपास भी न फटक सकें।
इसी को ध्यान में रखकर पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के समाज शास्त्र के प्रोफेसर विनोद चौधरी ने नई पहल शुरू की है। वह जगह-जगह सीडबैंक बनाएंगे। शुरुआत हरियाणा से की है। साथ ही चंडीगढ़ के आसपास के गांवों में भी यह सीडबैंक खोलने की योजना है। सीडबैंक में आने वाले परंपरागत अनाज किसानों को मुफ्त में इस शर्त पर मिलेगा कि वह उस बीज का पांच गुना सीडबैंक को वापस लौटाएंगे। इससे चेन बनती चली जाएगी और सीडबैंक का विस्तार होता जाएगा।
पहले चरण में उगाए सात अनाज
प्रो. विनोद कुमार चौधरी ने हरियाणा के भिवानी जिले की ढाणी रामजस में एक बीघा में परंपरागत अनाज लगाए हैं। इसमें कोदरा, कुटकी, कंगनी, संवाक, हरि कंगनी शामिल हैं। यह अनाज सेहतमंद हैं। कम पानी में उगने वाले हैं। बीपी, हार्ट, मोटापा आदि में यह रामबाण हैं।
इसके अलावा देसी बाजरा चार एकड़, देसी मूंग चार एकड़ में उगाए हैं। जैसे ही फैसल तैयार होगी तो इसके बीज सीडबैंक में रखे जाएंगे और यह किसानों को मुफ्त में दिए जाएंगे। वह अपने खेतों में लगाएंगे और जितना बीज उन्हें मुफ्त में दिया गया था तो उसका पांच गुना तब लिया जाएगा जब वह अपनी फसल तैयार कर लेंगे।
इस तरह बढ़ा कारवां
प्रो. विनोद चौधरी कहते हैं कि कोरोना के बाद लोगों का ध्यान इम्युनिटी बढ़ाने की ओर गया है। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए सबसे अधिक जरूरी है परंपरागत अनाज का प्रयोग। हाइब्रिड अनाज के कारण परंपरागत अनाज लुप्त होता गया। हाइब्रिड अनाज एक साल तो किसानों को मुनाफा देता है।
लेकिन बाद में खेत में यूरिया, डीएपी, पेस्टिसाइड आदि इतने डलवा देता है कि खेत की उर्वरा शक्ति कमजोर हो जाती है। उस खेत में फिर फसल तभी होती है जब यूरिया, डीएवी व दवाओं का प्रयोग किया जाए। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए परंपरागत अनाज उगा दिया है। यह किसानों को मुफ्त में देंगे। चंडीगढ़ के आसपास के गांवों में भी सीडबैंक खोलने की योजना है।