शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिए कोर्सों को लेकर समीक्षा में जुटा उच्चतर शिक्षा विभाग
मुख्यालय काॅलेजों से पहले ही मांग चुका कम दाखिले वाले और नए कोर्सों को लेकर ब्योरा
जून माह में पाठ्यक्रम, सीटें कम या ज्यादा करने को लेकर विभाग लेगा फैसला
चंडीगढ़। 12वीं के परिणाम जारी होने के बाद अब काॅलेजों में मिशन एडमिशन शुरू होने वाला है। उच्चतर शिक्षा विभाग ने इसके लिए तमाम तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार शिक्षा विभाग कम दाखिले वाले और कम रुझान वाले कोर्सों को बंद करने की तैयारी में है। साथ ही उन नए कोर्सों को शुरू करने की कोशिश की जाएगी, जिससे युवाओं को कौशलता मिले और कोर्स के बाद वह अपना रोजगार शुरू कर सकें। इस संबंध में विभाग पहले काॅलेजों से कम दाखिले वाले कोर्स और नए कोर्सों को लेकर काॅलेजों से ब्योरा और सुझाव मांग चुका है। जून में इन तमाम डाटा के आधार पर मंथन होगा और जुलाई में काॅलेजों में दाखिले का शेड्यूल जारी किया जाएगा।
उच्चतर शिक्षा विभाग ने 2023-24 के शैक्षणिक सत्र में हुए दाखिलों को देखते हुए राज्य के सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों से नए पाठ्यक्रम और बंद किए कोर्सों की रिपोर्ट मांगी थी। काॅलेजों से सहमति मांगी गई थी कि अगर वह कोई कोर्स बंद या शुरू कराना चाहते हैं तो अपनी राय दें। अधिकतर काॅलेज इस प्रक्रिया को पूरा कर चुके हैं। पिछले कुछ सालों के डाटा का आंकलन किया जाए तो पता चलता है कि परंपरागत पाठ्यक्रमों के प्रति विद्यार्थियों का रुझान कम हो रहा है। खासकर स्नातक कक्षाओं के परंपरागत कोर्सों में दाखिले की संख्या लगातार कम हो रही है। इसलिए तमाम आंकड़ों को देखने के बाद ही विभाग की ओर से नए पाठ्यक्रमों को शुरू करने, मौजूदा पाठ्यक्रमों को बंद करने और सीटें बढ़ाने व घटाने का फैसला लिया जाएगा।
हरियाणा में कुल 373 काॅलेज
इस समय प्रदेशभर में कुल 373 काॅलेज हैं। इनमें 182 सरकारी, 97 सहायता प्राप्त और 94 निजी काॅलेज शामिल हैं। इनके अलावा राज्य में 10 राज्य विश्वविद्यालय, 25 निजी विश्वविद्यालय और 11 अन्य संस्थान हैं। इस समय अलग-अलग 90 कोर्सों में करीब 1.31 लाख विद्यार्थी यहां पढ़ाई कर रहे हैं। इस बार हरियाणा में 12वीं पास करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 3.08 लाख हैं। सीबीएसई से 1.26 लाख और हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से पास हुए हैं। तीन लाख विद्यार्थियों के मुकाबले प्रदेश के कॉलेजों में स्नातक के लिए कुल 2,30,846 सीटें हैं। लेकिन अधिकतर विद्यार्थी या तो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं या फिर पढ़ाई के लिए विदेशों का रुख कर रहे हैं।
पिछले साल 99 हजार से अधिक सीटें रह गई थी खाली
पिछले साल इन सीटों के मुकाबले कुल 1,31,375 ही दाखिले हुए थे और चार बार तिथि बढ़ाने पर भी 99,471 सीटें खाली रह गई थी। इसी प्रकार स्नातकोत्तर (पीजी) में भी कुल 40,255 सीटों में से महज 21,558 सीटों पर भरी गई थी और 18,697 सीटें खाली रही थी। ऐसे में अब विभाग खाली सीटों को लेकर चिंता में है। कुल सीटों को भरना विभाग के लिए चुनौती है, इसलिए विभाग उन्हीं कोर्स को रखेगा, जिनमें विद्यार्थियों की रुचि है, जहां दाखिले कम हो रहे हैं, उन कोर्सों को बंद किया जाएगा।