फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रिश्वत लेना 'पाप', पर देना उससे बड़ा अपराध...हो सकती है कई साल की जेल, पढ़ें नियम

Thu, 20 Sep 2018 04:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
Bribe
विज्ञापन
रिश्वत लेना पाप है, पर देना उससे बड़ा अपराध। कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं, कई साल की जेल की सजा हो सकती है। नहीं जानते नियम, तो यहां क्लिक कीजिए।
विज्ञापन


पंजाब सतर्कता ब्यूरो ने भ्रष्टाचार रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2018 द्वारा किए गए संशोधनों के सावधानीपूर्वक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया। सतर्कता ब्यूरो के सभी फील्ड अधिकारियों ने इस कार्यशाला में भाग लिया। कार्यशाला के दौरान सतर्कता ब्यूरो के अधिकारियों ने पीसी अधिनियम, 1988 में निहित संशोधनों पर पीसी (संशोधन) अधिनियम, 2018 के रूप में चर्चा की।

यह खुलासा करते हुए मुख्य निदेशक-सह-एडीजीपी सतर्कता ब्यूरो बीके उप्पल ने कहा कि यदि रिश्वत देने वाला सतर्कता एजेंसियों को रिश्वत दिए जाने के सात दिन के भीतर मामले की रिपोर्ट नहीं करता है तो उसे रिश्वत देने के इल्जाम में अब सात साल कारावास की सजा हो सकती है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को रिश्वत देने के लिए मजबूर किया गया है और उसने इस मामले की कानून प्रवर्तन प्राधिकरणों को सात दिन के भीतर रिपोर्ट कर दी है तो उस पर रिश्वतखोरी का आरोप नहीं लगेगा।
विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

इस तरह चलेगा केस

प्रतीकात्मक तस्वीर
उन्होंने कहा कि एक्ट में संशोधन ने विजिलेंस ब्यूरो को किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करते समय मनमाने फैसले लेने या सिफारिशें करने संबंधी आरोपों की जांच या पूछताछ के लिए संबंधित सरकार या सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य बना दिया गया है।

लेकिन, उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में उक्त मंजूरी जरूरी नहीं होगी, जिनमें रिश्वत लेने के आरोप में व्यक्ति की गिरफ्तारी शामिल हो। उन्होंने बताया कि वाणिज्यिक संगठनों को जुर्माने से दंडित किया जाएगा अगर ऐसे संगठन किसी सरकारी कर्मचारी से अनाधिकृत सुविधाएं लेने के लिए उनकी हथेली गरम करने के दोषी पाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक संगठन के प्रभारी व्यक्ति को अपराध का दोषी पाए जाने पर उसे जुर्माना या जुर्माना राशि के बिना तीन से सात साल तक कारावास की सजा हो सकती है। उन्होंने बताया कि पीसी अधिनियम के तहत अब किसी भी अपराध का ट्रायल दो साल की अवधि में समाप्त होगा। इसके अलावा, देरी के मामले में, वैध कारणों को विशेष न्यायाधीश द्वारा दर्ज किया जाएगा और इसके बावजूद भी ट्रायल पूरा होने की कुल अवधि चार वर्ष से अधिक नहीं होगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें