चंडीगढ़। छह साल पहले वर्ष 2018 में सारंगपुर थाने में दर्ज नाबालिग युवती का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने का मामला फर्जी निकला। जांच के दौरान पता चला कि मकान मालिक द्वारा घर का किराया नहीं देने पर महिला को लीगल नोटिस भेजा था। इसके बाद महिला ने मकान मालिक के लड़के पर ही उसकी बेटी का अपहरण कर दुष्कर्म करने का आरोप लगाकर केस दर्ज करवा दिया। जांच में जब पूरे मामले की सच्चाई सामने आई और नोटिस देने के बाद भी पीड़िता कोर्ट ही नहीं पहुंची तो पोक्सो एक्ट की स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दर्ज की गई एफआईआर को ही रद्द कर दिया है।
हुआ यूं कि वर्ष 2018 में सारंगपुर थाना में स्थानीय कॉलोनी निवासी एक महिला ने शिकायत दर्ज करवाई थी। इस शिकायत में बताया गया कि उनके पड़ोस में रहने वाले युवक ने उसकी बेटी का अपहरण कर दुष्कर्म किया है। पुलिस ने पीड़ित युवती के बयान दर्ज किए और युवक के खिलाफ सारंगपुर थाने में आईपीसी 363 व पोक्सो एक्ट-8 के तहत केस दर्ज कर मामले में जांच शुरू कर दी। बाकायदा पुलिस ने भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कोर्ट में ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने 164 के बयान तक दर्ज करवा दिए।
जांच में सामने आई झूठे दुष्कर्म मामले की सच्चाई
जांच के दौरान पता चला कि जिस महिला ने युवक के खिलाफ उसकी बेटी के साथ दुष्कर्म करने व आरोपी के पिता द्वारा उसके साथ छेड़खानी करने की शिकायत की गई, वह पिता-पुत्र उनके पड़ोस में ही रहते हैं। यह मकान भी उन्हीं का है और शिकायतकर्ता महिला इसमें किराए पर रहती थी। जांच के दौरान सामने आया कि महिला ने मकान मालिक को किराया देने से बचने के लिए उन लोगों को झूठे केस में फंसाया था। मकान मालिक ने महिला को कई महीने तक किराया नहीं देने पर लीगल नोटिस भेजा था। इस नोटिस मिलने के कुछ दिनों बाद ही महिला ने मकान मालिक पर उससे छेड़खानी करने व उसके बेेटे पर उसकी बेटी का अपहरण करके दुष्कर्म करने के आरोप लगाए। पुलिस ने भी शिकायत के आधार पर उस समय केस दर्ज कर लिया था, लेकिन जांच में सच्चाई सामने आ गई।
कॉल लोकेशन नोएडा और मोहाली की निकली
पुलिस ने मामले में सच्चाई जानने के लिए मामले में नामजद युवक व उसके पिता की कॉल टावर लोकेशन निकलवाई। इस दौरान सामने आया कि जिस तारीख में महिला ने उसकी बेटी से दुष्कर्म का आरोप लगाया गया है, उस दिन पिता-पुत्र की कॉल टावर लोकेशन चंडीगढ़ नहीं बल्कि यूपी के नोएडा और मोहाली की निकली। इस दौरान यह भी सामने आया कि दुष्कर्म का केस दर्ज करवाने वाली महिला खुद नशा तस्कर है और एनडीपीएस मामले में भी शामिल थी। उसकी बड़ी बेटी ने भी एक युवक पर यौन उत्पीड़न का एक ऐसा ही मामला दर्ज कराया था और सुनवाई के दौरान वह अपने बयानों से पलट गई थी। जांच के दौरान आरोपियों के खिलाफ लगाए गए सारे आरोप झूठे पाए गए।
पुलिस ने कोर्ट में दायर कर दी थी एफआईआर कैंसिलेशन की रिपोर्ट
सारंगपुर थाना पुलिस ने मामले में जांच रिपोर्ट अपने आलाधिकारियों को बताई और इस एफआईआर को ही रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। करीब एक साल पहले पुलिस ने कोर्ट में एफआईआर कैंसिलेशन की रिपोर्ट सबमिट कर दी थी। कोर्ट ने बाकायदा रिपोर्ट दाखिल होने के बाद जांच अधिकारी और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किए गए। शिकायतकर्ता 3 अगस्त 2024 को कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुई और कहा कि वह जांच से संतुष्ट नहीं है और वह एक अलग शिकायत दर्ज कराना चाहती है। लेकिन महिला ने शिकायत दर्ज नहीं करवाई। इसके साथ ही महिला व उसकी बेटी को मेडिकल जांच के लिए भी कहा गया था जो कि उन्होंने नहीं करवाई थी। कोर्ट ने दिसंबर 2024 में सभी साक्ष्यों को बंद कर दिया था और अब पुलिस की जांच व कैंसिलेशन की रिपोर्ट देखते हुए दुष्कर्म की झूठी एफआईआर को रद्द करने के आदेश जारी कर दिए हैं।