चंडीगढ़। मनीमाजरा सिविल अस्पताल में सोमवार को डॉक्टरों का इंतजार करते-करते मरीज थक-हारकर बिना इलाज निराश होकर लौट गए। अस्पताल की आठ में से चार ओपीडी में डॉक्टर मौजूद ही नहीं हैं। ईएनटी, आई सर्जरी और मेडिसिन जैसी जरूरी ओपीडी के बाहर सुबह से मरीज कतारों में बैठे रहे लेकिन घंटों इंतजार के बावजूद डॉक्टर नहीं पहुंचे। मजबूरन मरीज बिना इलाज घर लौट गए।
आंखों के इलाज के लिए आए एक बुजुर्ग मरीज राधे श्याम ने बताया कि वह सुबह सात बजे घर से निकले थे। पर्ची भी कटवा ली लेकिन डॉक्टर आए ही नहीं। अब दोबारा आना पड़ेगा जबकि आने-जाने में ही पूरा दिन और पैसे खर्च हो जाते हैं। ईएनटी ओपीडी के बाहर बैठे एक युवक नरेश चंद्र ने कहा कि कान में तेज दर्द है, कई घंटे इंतजार किया लेकिन न डॉक्टर आए और न ही किसी ने सही जानकारी दी।
महिला मरीजों ने भी व्यवस्था पर नाराजगी जताई। मेडिसिन ओपीडी में आई एक महिला नीरजा ने कहा कि निजी अस्पतालों में इलाज महंगा है इसलिए सरकारी अस्पतालों का सहारा लेते हैं लेकिन यहां भी डॉक्टर न मिलें तो गरीब आदमी जाए तो जाए कहां। मरीजों का कहना है कि मनीमाजरा जैसे घनी आबादी वाले इलाके में यह अस्पताल हजारों लोगों के लिए एकमात्र सहारा है लेकिन डॉक्टरों की कमी के चलते आधे से ज्यादा मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा।
सुनील कुमार ने सवाल उठाया कि जब आठ में से चार ओपीडी बंद रहेंगी तो भीड़ कैसे संभलेगी। रोज सैकड़ों लोग यहां इलाज के लिए आते हैं। मरीजों ने आरोप लगाया कि कागजों में नियुक्तियां और दावे पूरे हैं लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। इलाज के बिना लौटे मरीजों ने प्रशासन से मांग की है कि डॉक्टरों की तैनाती जल्द की जाए और ओपीडी को नियमित रूप से संचालित किया जाए।