उन्होंने कहा कि नगर परिषद तपा पहले से ही वित्तीय संकट में है इसलिए ब्याज से नगर परिषद पर और बोझ पड़ेगा। इस वजह से ब्याज के लिए याचिकाकर्ता के दावे को अस्वीकार किया जा सकता है। कोर्ट ने नगर परिषद की इस दलील को खारिज कर दिया कि कमजोर वित्तीय स्थिति को सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन लाभ देने से इन्कार करने का आधार माना जा सकता है।
जस्टिस नमित कुमार ने कहा कि यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता के पेंशन लाभ जारी करने में कोई बाधा नहीं है। याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई लंबित नहीं है, जो उसके पेंशन लाभ रोकने का अधिकार देती। कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता प्रति वर्ष 9 प्रतिशत की दर से ब्याज की हकदार है।याचिका का निपटारा करते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता कोर्ट केस के खर्च की भी हकदार होगी, क्योंकि चतुर्थ श्रेणी सेवानिवृत्त कर्मचारी होने के नाते उसे अपने वैध बकाया का दावा करने के लिए तीन मामले दायर करने पड़े जिस पर 25,000 रुपये खर्च किया गया।
कोर्ट ने नगर परिषद को कोर्ट के आदेश की कॉपी मिलने के छह सप्ताह की अवधि के भीतर भुगतान करने का भी आदेश जारी किया। जस्टिस नमित कुमार ने कहा सेवानिवृत्त कर्मचारियों को केवल सेवानिवृत्ति लाभों पर अपना जीवन चलाना होता है। सेवानिवृत्ति लाभ जारी नहीं होने की स्थिति में कोई भी सेवानिवृत्त कर्मचारी सम्मानजनक जीवन नहीं जी पाएगा।