चंडीगढ़। शहर के आईएसबीटी-17 से कई रूटों पर समय सारिणी तय करने के लिए स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) के सचिव रूपेश कुमार की अध्यक्षता में सात राज्यों के परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ बुधवार को बैठक हुई। आईएसबीटी-17 से कई राज्यों के साथ आपसी समझौते के आधार पर समय सारिणी तय कर ली गई है और अब आखिरी मंजूरी के लिए परिवहन विभाग के सचिव को प्रस्ताव भेज दिया गया है।
जिन रूटों पर सहमति बनी है, उनमें आईएसबीटी-17 से करनाल, पानीपत, रोहतक, नारनौल, भिवानी, खाटू श्याम, आईएसबीटी-17 से कैथल, जींद, हांसी, भिवानी, फतेहाबाद, सिरसा, हिसार, श्री सालासर दरबार, आईएसबीटी-17 से 152(डी) एक्सप्रेसवे, आईएसबीटी-17 से डेराबस्सी, लालडू आदि से होते हुए अंबाला शहर आदि शामिल हैं। बुधवार को हुई बैठक के बाद स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के सचिव ने इन्हें मंजूरी देने के लिए परिवहन विभाग के सचिव नितिन कुमार यादव को भेज दिए हैं।
बता दें कि आईएसबीटी-17 से हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के विभिन्न जिलों के लिए बसें जाती हैं लेकिन कई दशकों से समय सारिणी नहीं बनी है, जिसकी वजह से अन्य रोडवेज की बसों पर चंडीगढ़ का कोई कंट्रोल नहीं है। वर्तमान में आईएसबीटी-17 से आपसी समझौते के आधार पर बसें चलाईं जा रही हैं, जिसका खामियाजा सीटीयू को भुगतना पड़ रहा है। कई रोडवेज अपनी मनमर्जी से बसें चला रहे हैं। समय सारिणी तय न होने की वजह से सरकारी खजाने को गुड्स व पैसेंजर टैक्स का भारी नुकसान हो रहा है और प्रशासन को भी करोड़ों रुपये की चपत लग रही है।
अब आईएसबीटी-43 के समय सारिणी पर काम शुरू
इसके साथ ही एसटीए ने अब आईएसबीटी-43 के समय सारिणी पर भी काम शुरू कर दिया है। एसटीए के सचिव ने सात राज्यों के परिवहन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह उन बसों की सूची और परमिट की जानकारी जल्द भेज दें, जिन्हें वह आईएसबीटी-43 से चलाना चाहते हैं। इसके बाद अगली बैठक की तारीख तय की जाएगी। इसमें आईएसबीटी-43 के समय सारिणी पर चर्चा की जाएगी। समय सारिणी को लेकर एसटीए ने आखिरी बैठक 29 दिसंबर को बुलाई थी, जिसमें सात राज्यों के परिवहन विभाग के अधिकारियों के सामने आईएसबीटी-17 की सर्वे रिपोर्ट को रखा गया था। उन्हें जानकारी दी गई थी कि विभाग ने फील्ड सर्वे किया है और उसके आधार पर नई समय सारणी का ड्राफ्ट बनाया है। इसे लागू करने से पहले सभी राज्यों को दिखाया गया। उन्होंने सुझाव व आपत्तियों के लिए समय की मांग की, जिसके बाद अब 10 जनवरी को बैठक तय हुई थी।