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टेलीकंसल्टेशन से समय की बचत और संक्रमण से बचाव, पीजीआई में प्रतिदिन 1500 से 1800 मरीजों को मिल रहा इलाज

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चंडीगढ़। कोरोना महामारी के दौर में अस्पतालों की ओपीडी बंद होने के कारण लाखों मरीज परेशान हैं। ऐसी स्थिति में पीजीआई की टेलीकंसल्टेशन सर्विस वरदान साबित हो रही है। इस सर्विस में प्रतिदिन 1500 से 1800 मरीज देखे जा रहे हैं। बुधवार को यह आंकड़ा 2000 के पार पहुंच गया। इसमें ओपीडी में 572 और टेलीकंसल्टेशन में 1454 मरीज देखे गए। ओपीडी में देखे गए मरीजों को टेलीकंसल्टेशन में परामर्श के बाद रेफर किया गया था। एक तरफ मरीज जहां इस सुविधा से समय पर इलाज प्राप्त कर रहे हैं, वहीं डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना काल में यह सुविधा वरदान साबित हो रही है। इसमें इलाज के साथ समय की बचत, प्रदूषण और यातायात से बचाव हो रहा है।
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पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसिन के प्रो. सोनू गोयल का कहना है कि गैर-संचारी रोगों का बोझ अभी और बढ़ेगा। ऐसी स्थिति में टेलीकंसल्टेशन सर्विस और ज्यादा उपयोगी साबित होगी। इसे देखते हुए ही डब्ल्यूएचओ ने भी इसे बेहतर विकल्प के रूप में सुझाया है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 के पहले ही पंजाब में सभी डॉक्टरों को टेलीमेडिसिन का प्रशिक्षण दिया जा रहा था। लॉकडाउन के कारण अस्पतालों की ओपीडी बंद होने के बाद टेलीकंसल्टेशन ने परेशानी को काफी हद तक कम किया है। वहीं, इस सुविधा का लाभ उठा रहे मरीजों का कहना है कि शुरुआती दौर में फोन लगाना और पंजीकरण कराना बहुत कठिन प्रक्रिया लग रहा था, लेकिन सुविधा मिलने के बाद यह बात समझ में आ गई कि अस्पतालों में यहां-वहां चक्कर लगाने से टेलीकंसल्टेशन सर्विस सौ गुना बेहतर है। इसमें जरूरत पड़ने पर ही मरीज को अस्पताल आने के लिए कहा जा रहा है। उससे पहले की सारी प्रक्रिया ऑनलाइन तकनीक से ही पूरी कर ली जा रही है ताकि आने-जाने और अस्पताल में घंटों इंतजार करने की समस्या से जूझना नहीं पड़े।
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