हादसे के बाद बिचपड़ी गांव का मंदिर शिवरात्रि के बावजूद मंगलवार को सुनसान रह गया। पूरे गांव में शिवरात्रि का त्योहार नहीं मनाया गया। जिस त्योहार को लेकर गांव के 17 युवा कांवड़ लेने गए हुए थे और अपने परिजनों से बात करते हुए उन्होंने गांव के समीप पहुंचने की सूचना दे दी थी, उसके बाद से गांव में जश्न जैसा माहौल था।
आधी रात होने के बावजूद ग्रामीण गांव के मंदिर में की गई तैयारियों के तहत डीजे बजाकर शिव भजनों पर झूम रहे थे। अचानक से एक तूफान आया और गांव के तीन घरों के चिराग को बुझा गया।
गांव के शिव मंदिर में शिवलिंग पर जलाभिषेक तक नहीं हुआ। जिस गांव में एक दिन पहले चहल-पहल, मंदिर में शिवरात्रि की तैयारियां और हंसी-खुशी का माहौल था, वहीं मंगलवार को मातम पसरा हुआ था।
गांव में एक साथ जलीं तीन चिताएं
पुलिस ने तीनों शवों को रात अपने कब्जे में लेकर जिला नागरिक अस्पताल में पहुंचाया दिया था। मंगलवार सुबह शवों का पोस्टमार्टम करवा कर पुलिस ने उनके परिजनों को सौंप दिए।
शवों को ग्रामीण एक साथ गांव लेकर गए और उसके बाद गांव के श्मशानघाट में एक साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। एक साथ तीन चिताएं जलती देख हर किसी की आंखें नम थीं। इस दौरान पूरे गांव में चूल्हा तक नहीं जला।