तीन साल की मासूम बच्ची इस दुनिया को अलविदा कह गई। कंचन ने अभी दुनिया को ठीक से देखा भी नहीं था, लेकिन भगवान ने उसे अपने पास बुला लिया। कंचन इस दुनिया से तो चली गई, लेकिन जाते-जाते वह दूसरे मरीज को नया जीवन दे गई।
चंडीगढ़ के गांव कैंबलाला की मासूम कंचन दुर्घटना का शिकार हो गई थी। कंचन को एक कार ने टक्कर मार दी थी। जिसके बाद परिवार ने उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया था। लगभग 10 दिन तक मासूम ने जिंदगी और मौत के बीच लड़ाई लड़ी, लेकिन आखिर में वह हार गई।
पीजीआई के डॉक्टरों ने बच्ची को ब्रेन डेड घोषित कर दिया, जिसके बाद परिवार ने बच्ची के अंगदान का फैसला लिया। बच्ची के अंगदान से पीजीआई में भर्ती महिला मरीज को नया जीवन मिला है। बच्ची की दोनों किडनी महिला को ट्रांसप्लांट की गई है।
पीजीआई डाक्टरों ने बच्ची को बचाने की भरपूर कोशिश की
जानकारी के अनुसार 28 जुलाई को कंचन एक कार की चपेट में आ गई थी। कैंबवाला निवासी कंचन के पिता लाल सिंह बेटी को इलाज के लिए सेक्टर-16 स्थित गर्वनमेंट मेडिकल स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल (जीएमएसएच-16) लेकर आए। कंचन को 28 जुलाई को जीएमएसएच 16 में भर्ती कराया गया था। बाद में उसी दिन बच्ची को पीजीआई रेफर कर दिया गया। पीजीआई डॉक्टरों की टीम ने बच्ची को बचाने के लिए पूरे प्रयास किए। बावजूद ब्रेन स्टेम डेथ कमेटी की तरफ से गहन मूल्यांकन के बाद कंचन को छह अगस्त को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
महिला की दोनों किडनी हो चुकी थीं खराब
कंचन के पिता लाल सिंह ने परोपकार की गहरी भावना दिखाते हुए उसके सभी अंगों को दान करने के लिए सहमति जताई। इसके बाद पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती 26 वर्षीय महिला जिसकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी थी, उसे कंचन की दोनों किडनी ट्रांसप्लांट की गई। इससे महिला मरीज को नई जिंगदी मिली है।
पीजीआई निदेशक ने परिवार की सराहना की
पीजीआई निदेशक प्रोफेसर विवेक लाल ने मासूम बच्ची के परिवार का आभार व्यक्त किया। प्रो. विवेक लाल ने कहा कि इस दुख की घड़ी में बच्ची के पिता लाल सिंह ने अपनी प्यारी बेटी के अंगों को दान करने का जो फैसला लिया वह आशा और मानवता का प्रतीक है। कंचन के नेक कार्य को हमेशा याद किया जाएगा और संजोया जाएगा। अंगदान की सच्ची भावना और कई जिंदगियों को बचाने की क्षमता का प्रतीक है। वहीं, पीजीआई चिकित्सा अधीक्षक सह नोडल अधिकारी, आरओटीटीओ के चिकित्सा अधीक्षक विपिन कौशल ने भी परिवार की निस्वार्थता की सराहना की।
पिता बोले- बेटी को खोना कठिन अनुभव
कंचन के पिता लाल सिंह ने कहा कि बच्ची को खोना हमारे जीवन का सबसे कठिन अनुभव है, लेकिन यह जानकर अच्छा लग रहा है कि बेटी के अंगदान से किसी दूसरे को जीवन का दूसरा मौका दिया है। हमें उम्मीद है कि हमारा निर्णय दूसरों को भी अंगदान के लिए प्रेरित करेगा। अंगदान से दूसरों का जीवन बचाने में मदद मिलती है।