एजेंटों ने विद्यार्थियों से लाखों रुपये वसूलकर यूनिवर्सिटी में उनका एडमिशन करवा दिया। इस तरह पिछले सेशन में पंजाब से स्टडी वीजा पर करीब 5 हजार युवक यूके पहुंच गए। लेकिन इससे पहले की विद्यार्थी दूसरे सेमेस्टर की फीस भरते, करीब 3 हजार स्टूडेंट भाग निकले। वोल्वर हैंपटन यूनिवर्सिटी का तो हाल बेहाल हो गया, वहां पर नाम मात्र बच्चे ही रह गए।
आधा दर्जन शिक्षा संस्थानों का रद्द हो सकता है लाइसेंस
ब्रिटिश कानून के मुताबिक, अगर विद्यार्थी स्टडी के लिए आकर शिक्षा संस्थान से निकल जाते हैं तो संस्थान का लाइसेंस रद्द हो सकता है। जिससे करीब आधा दर्जन शिक्षा संस्थानों के लाइसेंस पर तलवार लटक गई है। पंजाब के एजेंटों ने पैसा तो कमा लिया, लेकिन उनकी हरकत का खामियाजा कई शिक्षा संस्थानों को उठाना पड़ सकता है। उनके लाइसेंस रद्द हो सकते हैं और इस फर्जीवाड़े के चलते पंजाबी विद्यार्थियों का वीजा बंद कर सकता है।
10 साल बाद यूके ने खोला था स्टडी वीजा
इसके पहले 2007-08 में यूके ने स्टडी वीजा खोला था तब भी पंजाब के एजेंटों ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भारी संख्या में युवकों को स्टूडेंट बनाकर यूके भेज दिया था। उनकी इसकी करामात के कारण वहां की सरकार ने वीजा बंद कर दिया था और 10 साल तक स्टूडेंट वीजा ओपन नहीं किया।
हां ऐसा हुआ है, कई विद्यार्थी खिसक गए हैं...
हां, ऐसा हुआ है, कई यूनिवर्सिटी खाली हो गई हैं। वह एजेंटों के बारे में तो नहीं कुछ बोल सकते, लेकिन स्टूडेंट्स वहां पर स्टडी छोड़कर भाग गए हैं, जिसका काफी बुरा असर हो सकता है। -सुकांत, पूर्व प्रधान, एसोसिएशन ऑफ ओवरीज एजुकेशन