विश्व नशा विरोधी दिवस पर फिरोजपुर में तीन युवकों की नशे से मौत हो गई। फिरोजपुर में सरेआम हेरोइन, स्मैक व गांजा बिक रहा है, पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। कई तस्करों के पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कथित तौर पर दोस्ती है। सीमांत गांवों में नशा बेचने वालों के कई सियासी लोगों से संबंध हैं। यही कारण है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह नशे पर रोक लगाने में कामयाब नहीं हुए हैं।
गांव सतियावाला निवासी मक्खन सिंह (26) जो नशे का आदी था। इसका फिरोजपुर सिविल अस्पताल में बने नशा छुड़ाओ सेंटर और फरीदकोट में इलाज चल रहा था। मंगलवार तड़के अचानक उसकी तबीयत बहुत खराब हो गई, उसके शरीर में इस कदर दर्द हुई की उसकी मौत हो गई।
इसी तरह गांव कुमगर निवासी अमरीक सिंह नशे का आदी था। मंगलवार को उसकी अचानक तबीयत खराब हुई, उसे फिरोजपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में दाखिल कराया जहां उसकी मौत हो गई। वहीं गांव आरएफके निवासी सतनाम सिंह उर्फ बिल्ला जो नशे का आदी था। सोमवार को इसकी तबीयत खराब हुई, उसे डाक्टर के पास लेकर गए, जहां डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मृतकों के परिजनों का कहना है कि फिरोजपुर में सरेआम हेरोइन व स्मैक बिक रही है, पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करती है। नशे बेचने वाले तस्करों के पुलिस अधिकारियों के साथ भी कथित तौर पर संबंध हैं। परिजनों की मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से मांग है कि वह फिरोजपुर की तरफ ध्यान दें, जहां नौजवान नशे की लत से मौत को प्यारे हो रहे हैं। पंजाब से नशा खत्म नहीं हुआ तो पंजाब की जवानी नष्ट हो जाएगी।