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मगरा में तीन और गाय ने दम तोड़ा

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लालड़ू। मगरा गोशाला में गायों के मरने का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को तीन और गायों ने दम तोड़ दिया। इसी के साथ यह संख्या करीब 70 हो चुकी है। अमर उजाला में गोशाला की बदहाली उजागर करने के बाद गोसेवा कमीशन ने जांच शुरू की। विधायक खुद दौरा करने पहुंचे। शुक्रवार को फिर अमर उजाला ने गोशाला का दौरा किया तो पाया यहां हालात नहीं बदले। गायों की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है।
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सर्दी से बचाने के लिए पर्याप्त इंतजाम अभी तक नहीं किए गए हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत यहां सफाई की है। पशुओं के नीचे से गोबर नहीं उठाया जाता। ऐसे में वहां दलदल जैसी गंदगी जमा हो गई है। इस कड़ाके की ठंड में बेजुबान पशु इसी कीचड़ में बैठने को मजबूर हैं। 15 गायें शुक्रवार को इसी गंदगी में बैठी कांप रही थीं। दोपहर तक इन्हें चारा तक नहीं दिया गया था। वहां मौजूद मजदूरों ने बताया कि पशुओं की संख्या ज्यादा है और मजदूरों की संख्या कम है। इस कारण चारा देने में देरी हुई।
कड़ाके की ठंड में भी खुले में गायें
कुछ शेड तिरपाल से कवर किए गए हैं लेकिन बहुत से पशु अभी शेड में खुले आसमान के नीचे ठिठुर रहे हैं। इनके लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है। 11 डिग्री तापमान में यह गायें कैसे रह रही हैं, इसका दर्द आसानी से समझा जा सकता है।
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तीन दिन से पड़े मृत पशु को नहीं उठाया गया
पार्षद रघुबीर जुनेजा ने बताया कि हल्का विधायक एनके शर्मा की ओर से गोशाला में एक ट्राली हरे चारे की भेजी गई है। उन्होंने ने बताया कि इस सारी अव्यवस्था के लिए प्रबंधक जिम्मेदार हैं। उन्होंने दिखाया कि गोशाला में एक मृत पशु पिछले तीन दिन से शेड के पिछली ओर कीचड़ में मरा पड़ा था लेकिन प्रबंधकों को इसकी जानकारी तक नहीं थी।
पैरों में जमा गंदगी से पशुओं को लग रही ज्यादा ठंड
गोधन का उपचार कर रहे डेराबस्सी के सीनियर वेटरिनरी डॉक्टर विमल कुमार का कहना है कि बीमार पशुओं की हालत बहुत ही चिंताजनक है। इन्हें न तो पर्याप्त चारा मिल रहा है, न ही सर्दी से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। यही कारण है कि पशुओं की हालत में सुधार नहीं हो रहा है। बीमार पशुओं की हालत ज्यादा चिंताजनक है।
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