चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय में इस समय शिक्षक छात्रों की प्रायोगिक परीक्षाएं ले रहे हैं, लेकिन यह परीक्षा केवल दो से तीन मिनट मौखिक आधार पर हो रही है और उन्हें नंबर भी अच्छे मिल रहे हैं। पीयू प्रशासन का निर्देश है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाए। हालांकि कुछ शिक्षक इसको लेकर परेशान हैं, क्योंकि वह जब तक विद्यार्थियों का पूरा मूल्यांकन नहीं कर लेते तब तक अंक नहीं देते लेकिन अब स्थितियां अलग हैं।
पीयू के विज्ञान वर्ग की प्रायोगिक परीक्षाएं इस समय शिक्षक ले रहे हैं। इस परीक्षा का नियम है कि विद्यार्थियों से प्रयोगशाला में प्रयोग करवाए जाएं। साथ ही प्रोजेक्ट वर्क कॉपी में करवाया जाए। आखिरी में मौखिक मूल्यांकन होता है। कुल 80 अंकों की इस प्रायोगिक परीक्षा में मौखिक मूल्यांकन के पांच ही अंक तय हैं। बाकी 75 फीसदी अंक उसके प्रयोग व प्रोजेक्ट कॉपी के दिए जाते हैं। इस समय शिक्षकों से कहा गया है कि वह विद्यार्थियों का मौखिक मूल्यांकन करके ही अंक दें। कोरोना को इसका कारण माना गया है। शिक्षक विद्यार्थियों का मौखिक मूल्यांकन कर रहे हैं। कुछ शिक्षक दुखी हैं। उनका कहना है कि मौखिक मूल्यांकन पांच नंबर का है। उसके आधार पर कैसे पूरे 80 अंक दिए जा सकते हैं। हालांकि शिक्षकों की मजबूरी है। कुछ विद्यार्थियों को पूरे अंक दे रहे हैं तो कुछ कम।