थियेटर का शौक रखते हैं तो तैयार हो जाएं। चंडीगढ़ में 30 दिवसीय फेस्टिवल होने जा रहा है, जिसमें रंगमंच की दुनिया के कई रंग देखने को मिलेंगे। यह फेस्टिवल आयोजित करने जा रहा है चंडीगढ़ का थिएटर फार थिएटर ग्रुप। खूबी यह है कि इस फेस्ट के दौरान आपको कई नाटक, नुक्कड़ नाटक और प्रसिद्ध नाटककार देखने को मिलेंगे। एक माह तक चंडीगढ़ के आर्टिस्टों को न सिर्फ इन नाटककारों से सीखने को मिलेगा बल्कि उनकी बेस्ट प्रेक्टिस को अपनाने का मौका भी मिलेगा।
चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में यह थिएटर फेस्टिवल 29 जनवरी से शुरू होगा और 27 फरवरी तक चलेगा। इसमें मंच रंगमंच ग्रुप द्वारा केवल धालीवाल का निर्देशित नाटक पुल सिरात, नाट्यम ग्रुप द्वारा कीर्ति किरपाल निर्देशित नाटक मुध आ लम्हा तो, संभव ग्रुप द्वारा डा. डीआर अंकुर द्वारा लिखा नाटक दो एकांत, सुरेश शर्मा द्वारा निर्देशित नाटक मौलाना, ड्रामेटिक आर्ट्स एंड डिजाइन एसोसिएशन के बैनर तले गोविंद सिंह यादव का डायरेक्ट किया गया नाटक तानसेन, ट्रेजर आर्ट एसोसिएशन द्वारा जाय मैसनाम द्वारा निर्देशित नाटक द जर्नी आफ सारो का मंचन होगा।
इसके साथ ही प्रसिद्ध नाटक नागमंडला का मंचन रस कला मंच द्वारा किया जाएगा, जिसका निर्देशन रवि मोहन करेंगे। अभिन्य रंगमंच द्वारा मनीष जोशी निर्देशित नाटक लुखमिप्रेम का मंचन किया जाएगा। स्वांग ए फॉक आर्ट अकादमी के बैनर तले सतीश कश्यप का लिखा नाटक शिव पावर्ती का मंचन भी टैगोर के रंगमंच पर किया जाएगा। आलोक रस्तोगी का निर्देशित नाटक किनु कहर का थिएटर का मंचन भी फेस्ट के दौरान किया जाएगा।
ऐसा राहो की धरती का मंचन संघन सोसायटी फार कल्चर एंड वेलफेयर द्वारा किया जाएगा, इस नाटक का निर्देशन आनंद मिश्रा करेंगे। इसके साथ ही यहां तपन भट्ट का निर्देशित नाटक रांग नंबर का मंचन होगा। इसी समारोह में राजू कुमार रायकवर का नाटक पांचाली की शपथ का मंचन किया जाएगा। थिएटर डिपार्टमेंट आफ पटियाला द्वारा प्रोफेसर जसपाल देओल का निर्देशित नाटक धारावी 1947 का मंचन भी यहां किया जाएगा। योगेंद्र चौबे का लिखा शानदार नाटक बाबा पांखुड़ी भी यहां आपको देखने को मिलेगा।
द कटकथा पपेट आर्ट्स ट्रस्ट द्वारा यहां अनुपूर्णा राय द्वारा महाभारत पपेट का मंचन किया गया। केहर ठाकुर का नाटक चिड़िया के बहाने का मंचन, उषा गांगुली का नाटक हम मुखतारा का मंचन, रमन मित्तल का नाटक चेखव की दुनिया के साथ ही यहां संवाद थिएटर द्वारा मंचित नाटक चेखव की दुनिया भी होगा। टैगोर के मंच पर ही कालापानी, मौसा जी जय हिंद, मे बी दिस समर और जब जागो तभी सवेरा का मंचन किया जाएगा।