अस्पताल की अव्यवस्था से मेरी मां की जान गई है। रात 11 बजे से 12.30 बजे तक अस्पताल में बिजली नहीं थी। आईसीयू में वेंटिलेटर बंद थे। इसके कारण मेरी मां तड़प तड़प कर मर गई। अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। -हरप्रीत सिंह ( मृतक जगजीत कौर का बेटा), मोहाली
अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ हो कार्रवाई
मेरी मां वेंटिलेटर बंद होने के कारण दुनिया से चली गई। अस्पताल की अव्यवस्था को लेकर हमने पुलिस में शिकायत दी है। पुलिस को प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। - सतपाल ( मृतक सुखविंदर कौर का बेटा), फतेहगढ़ साहिब
डेढ़ घंटे तक बंद वेंटिलेटर पर तड़पती रही मेरी मां
मेरी मां 17 मई को जीएमसीएच में भर्ती हुई थी। हम यहां अस्पताल के बाहर कमरा लेकर रह रहे थे। शनिवार देर रात अचानक अस्पताल से फोन आया कि उनकी हालत बिगड़ गई है। अस्पताल पहुंचने पर बताया कि उनकी मौत हो चुकी है। मेरी मां की स्थिति बहुत खराब थी। वेंटिलेटर सपोर्ट चंद सेकेंड के लिए भी हटाने पर वह तड़पने लगती थी। ऐसे में डेढ़ घंटे तक वेंटिलेटर बंद रहने पर वह कैसे बच सकती थी। अस्पताल की लापरवाही के कारण उनकी मौत हो गई। अमन( मृतक राजविंदर कौर का बेटा), मानसा
बाहर से खरीदकर लाया ऑक्सीजन मास्क फिर भी नहीं बच सकी पत्नी
20 मई को मैंने पत्नी को जीएमसीएच 32 में भर्ती कराया था। लेकिन अस्पताल वालों ने उसकी जान ले ली। बीपीएल कार्ड होने के बावजूद हमसे 3 हजार रुपये का ऑक्सीजन मास्क भी बाहर से खरीद कर मंगवाया गया। हमने अपने मरीज की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। लेकिन अस्पताल की लापरवाही से वह बच नहीं सकी। जसवंत सिंह( मृतक अनिता का पति), ड्डुमाजरा चंडीगढ़
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुधीर गर्ग का कहना है कि तूफान के कारण बिजली चली जरूर गई थी लेकिन अस्पताल के सभी क्रिटिकल एरिया में जनरेटर बैकअप है। लाइट जाते ही 30 सेकेंड के अंदर आपूर्ति बहाल हो जाती है। अचानक लोड बढ़ने के कारण जनरेटर बैकअप प्रभावित होने लगा। लेकिन उसे भी तत्काल मेंटेन कर लिया गया। वेंटिलेटर बंद होने के कारण किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई है। वे सभी मरीज बेहद गंभीर स्थिति में थे। इसलिए इलाज के दौरान उनकी मौत हुई है न कि वेंटिलेटर बंद होने से।
ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हुई प्रभावित
तूफान के कारण बिजली आपूर्ति बंद होने से जीएमसीएच में ऑक्सीजन की आपूर्ति में किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई। तरल ऑक्सीजन से आपूर्ति निर्बाध जारी थी। प्रत्येक वेंटिलेटर में पावर बैकअप है, जो क्रियाशील था। जनरेटर भी ऑटो स्टार्ट मोड पर थे, जो तत्काल चालू हो गए थे। अस्पताल की निदेशक प्रिंसिपल व चिकित्सा अधीक्षक द्वारा बताया गया है कि जिन 4 मरीजों की मौत हुई है, वह कोरोना संक्रमित थे। उनकी स्थिति बेहद गंभीर थी। उनकी मौत स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण हुई है। इसमें बिजली किसी भी तरह से कारण नहीं था। बिजली की समस्या का जीएमसीएच 32 में चिकित्सा सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ा। -यशपाल गर्ग, प्रभारी जीएमसीएच 32 कोविड प्रबंधन
चंडीगढ़ प्रशासन और अस्पताल ने जारी किया बयान: वेंटिलेटर बंद नहीं थे
चंडीगढ़ प्रशासन और जीएमसीएच-32 ने परिजनों के आरोप को गलत ठहराया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जिन चार मरीजों की मौत हुई है, उनकी मेडिकल कंडीशन पहले से ही गंभीर थी। इन मरीजों की मौत 30 मई को रात 12.20 बजे, रात 1.15 बजे, 1.30 और रात दो बजे हुई है। अस्पताल प्रशासन ने बयान में कहा कि इन मरीजों की मौत वेंटिलेटर बंद होने या बिजली सप्लाई बाधित होने से नहीं हुई है। बिजली आपूर्ति ठप होने के 30 सेकेंड के अंदर ही जनरेटर शुरू हो गया था। ऐसे में यह कहना कि वेंटिलेटर बंद होने से मौत हुई है, गलत है।