बेटी के साथ निधी मरवाहा, एसएसपी अमनीत कौंडल (साथ में बेटी) व एसएसपी कंवरदीप कौर (साथ में बेटा)।
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फतेहगढ़ साहिब की एसएसपी अमनीत कौंडल के पति गिरीश दयालन मोहाली के डीसी हैं। दोनों के कंधों पर अहम जिम्मेदारी है। अमनीत कौंडल कहती हैं कि अयशा अभी चार साल की है, उसको पिछले एक साल से वक्त नहीं दे पाई हूं। घर में भी जाती हूं तो फोन कॉल्स और फाइलों में समय निकल जाता है।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में तो बिलकुल एक मिनट वक्त नहीं है। दिन भर कार्यालय में बिताने के बाद घर पहुंचते ही बेटी की किलकारियां सुनने को मिलती है तो दिल पसीज जाता है लेकिन फिर ख्याल आता है कि वर्दी भी है, जिसका फर्ज निभाना है। इस समय समाज को हमारी जरूरत है।
पति पटियाला के डीसी और खुद नवांशहर की एसएसपी, बेटे का ख्याल नहीं रख पा रहीं
नवांशहर की एसएसपी अलका मीणा अपने फर्ज के आगे ममता का नाम आते ही कहती है कि संकट का समय है। यदि हम लोग ही दूसरों की मदद नहीं करेंगे तो कौन करेगा। अपने से ज्यादा दूसरों का ख्याल रखना ही मेरा फर्ज है। शायद इसीलिए मेरे फर्ज के आड़े ममता नहीं आ पाई। कोरोना से जंग लड़नी है और इसको हराना है, इसलिए पूरी शिद्दत के साथ अपना काम करूंगी। नवांशहर वह जिला है, जहां पंजाब का पहला कोरोना संक्रमित मरीज मिला था।
अलका मीणा के पति कुमार अमित पटियाला के डीसी हैं। दोनों पति पत्नी के कंधों पर पूरा बोझ है। अलका कहती है कि मेरा बेटा अयान छह साल का है। उसको मां बाप का पूरा प्यार नहीं मिल रहा है लेकिन फिर ख्याल आता है कि एक मां के साथ-साथ एसएसपी भी तो हूं, जिसका फर्ज अपने जिले के लोगों की जिंदगी को बचाना और उनको सुरक्षित रखना है। बच्चे अपने मां-बाप को महामारी में खो न दें, उनको बचाना मेरी प्राथमिकता है।
बेटी को सास संभालती हैं, एक साल से उसकी तरफ ध्यान ही नहीं दिया: निधि मरवाहा
नेहरू गार्डन स्कूल की राजनीति शास्त्र की लेक्चरर निधि मरवाहा का कहना है कि पिछले साल से जब से लॉकडाउन लगा है, शिक्षकों पर दोहरी जिम्मेदारी आ गई है। एक तो स्कूल के बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाना, ऊपर से उनको किताबों से जुड़े रहने के लिए उत्साहित करना। सरकारी स्कूलों के बच्चों के पास फोन व नेट की सुविधा भी काफी कम होती है, गरीब बच्चे इन स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करते हैं। पूरा दिन फोन कॉल्स के साथ-साथ बच्चों को पढ़ाने में निकल जाता है।
बच्चे स्कूल में शिक्षक के साथ केवल किताबों व कापी के जरिए नहीं बल्कि दिल से जुड़े होते हैं, शिक्षक की आवाज उनके भीतर गजब की ऊर्जा पैदा करती है। इसलिए कई बार बच्चों को दिन में कॉल कर समझाना पड़ता है। बेटी भाविका सात साल की हो चुकी है और अब सास के हवाले है। वह दूसरी कक्षा में आ गई है। मेरा फर्ज इस समय अपने स्कूल के बच्चों को उत्साहित कर पढ़ाना है।
नेहरू गार्डन स्कूल की एजुकेशन प्रोवाइडर नवदीप कौर का कहना है कि जब से स्कूल खुले हैं, मेरा स्कूल आना जरूरी हो गया है। बेटा अगम सिंह दो साल का होने जा रहा है लेकिन अब वह सासू मां के हवाले है। उसको बचपन में जो सिखाया जाना चाहिए, वह सिखा नहीं पा रही हूं। स्कूल में बच्चों की ऑनलाइन स्टडी का काफी बोझ है।
घर जाकर काफी थकान हो जाती है, क्योंकि सारा दिन मोबाइल पर पढ़ाना पड़ता है। कई बार सोचा कि छुट्टी लेकर बेटे का ख्याल करूं, लेकिन फिर फर्ज याद आ जाता है...नहीं मेरे कंधों पर कितने बच्चों की शिक्षा का दायित्व है, अगर वह फेल हो गए तो। इसलिए काम को प्राथमिकता देती हूं।
पंजाब में बेस्ट पार्षद का खिताब हासिल करने वाली अरुणा अरोड़ा तीसरी बार पार्षद बनीं हैं। उनके इलाके को सबसे स्वच्छ व बेहतरीन इलाका होने का इनाम भी मिला है। पिछले एक साल से जब से कोरोना संक्रमण फैला है, वे 6 बजे घर से निकल जाती हैं, सफाई सेवकों के साथ पूरा इलाका साफ करवाती हैं और फिर गलियों को सैनिटाइज करवाती हैं। अरुणा ने एक साल से बेटे अंशुल के साथ बैठकर सुबह का नाश्ता नहीं किया है।
बेटा सोया होता है, तभी वह मैदान में निकल जाती है और 12 बजे घर लौटती है। तब तक बेटा काम पर जा चुका होता है। फिर उसके बाद पूरा दिन गरीबों में राशन बांटने के अलावा उनकी समस्याओं और लोगों को इलाज की सुविधा प्रदान करवाने में निकल जाता है। अरुणा के पति मनोज अरोड़ा जालंधर योजना बोर्ड के चेयरमैन हैं। वे कहती हैं कि अंशुल की मां के साथ-साथ पूरे इलाके के बच्चों की भी मां हूं। मेरा उनके प्रति फर्ज है, जिसको निभाना है।