चंडीगढ़ पीजीआई के कोरोना डेडीकेटेड हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की देखभाल करने वाली कोरोना वॉरियर्स की टीम को इस बात का गर्व है कि उन्होंने संक्रमण के डर को दूर कर मरीजों की एक बच्चे की तरह देखभाल की और अपने फर्ज को सफलतापूर्वक पूरा किया।
पीजीआई के आईसीयू में तैनात डॉक्टर, टेक्निकल स्टाफ, नर्सिंग स्टॉफ में शामिल कोरोना वॉरियर्स का मानना है कि अगर वह डर जाते तो शायद अपने फर्ज को अच्छी तरह से पूरा नहीं कर पाते। टीम में शामिल जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर मलिक अर्जुन, सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर रिया, टेक्निकल स्टाफ अनुजा और नर्सिंग ऑफिसर मनजीत कौर व शिखा ने एक दूसरे की ताकत बनकर आईसीयू में भर्ती मरीजों की जी जान से देखभाल की।
परिवार से दूर रहकर निभाया फर्ज
नर्सिंग ऑफिसर मनजीत कौर ने बताया कि आईसीयू में 5 लोगों की टीम ने ड्यूटी के दौरान अपने परिवार से अलग रहकर अपना फर्ज निभाया। मनजीत ने बताया कि उनका तीन साल का एक बेटा है, जो अपनी मौसी के पास रह रहा है। उनका कहना है कि बेटे को उनकी कमी महसूस न हो इस कारण उन्होंने उसे मौसी के पास छोड़कर अपनी ड्यूटी संभाली। डॉ. रिया ने भी अपने माता-पिता से दूर रहकर संक्रमण के खतरे के बीच ड्यूटी की। वह कहती हैं कि अगर डॉक्टर भी डर गए तो बीमारी का इलाज कौन करेगा। इस टीम का कहना है कि इस महामारी में एक दूसरे की ताकत बनकर ही कोरोना को हराया जा सकता है।
पीजीआई की व्यवस्था पर भरोसा
टीम की सदस्य अनुजा ने बताया कि ड्यूटी के दौरान आईसीयू में दो बहुत गंभीर मरीज भर्ती थे। उनकी देखभाल करने के लिए उनकी टीम को ड्यूटी के समय काफी दौड़भाग करनी पड़ती थी। पीपीई किट पहनकर ठीक से चलने में भी परेशानी होती है। ऐसी स्थिति में भागदौड़ करना बहुत मुश्किल था। मरीजों के लिए उनके स्तर पर की गई एक सेकेंड की देरी खतरनाक साबित हो सकती थी इसलिए उन्होंने अपनी तकलीफ और परेशानियों को दरकिनार कर मरीजों का ख्याल रखा।
डॉक्टर मलिक और नर्सिंग ऑफिसर शिखा ने बताया कि पीजीआई में कोरोना के मरीजों के लिए बनाए गए कोरोना डेडीकेटेड हॉस्पिटल की व्यवस्था इतनी पुख्ता है कि वहां संक्रमण फैल ही नहीं सकता। इसलिए उन्हें ड्यूटी के दौरान किसी प्रकार का कोई तनाव नहीं हुआ। डॉक्टर मलिक का कहना है कि अस्पताल में मरीजों के बीच हमारी सुरक्षा को लेकर पीजीआई प्रशासन हर स्तर पर मुस्तैद है इसलिए हम निश्चिंत होकर अपनी ड्यूटी कर पाए।