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Chandigarh News: यहां डॉक्टरी ही नहीं... डॉक्टरों के लिए चलती हैं हिंदी की कक्षाएं

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चंडीगढ़। पीजीआई में डॉक्टरी ही नहीं... डॉक्टरों के लिए हिंदी की कक्षाएं चल रही हैं। इन कक्षाओं का मकसद केवल भाषा सिखाना नहीं बल्कि डॉक्टर और मरीज के बीच भरोसे का रिश्ता मजबूत करना है। अक्सर मरीज बीमारी से कम और इलाज की भाषा से ज्यादा परेशान होते हैं। जब सामने डॉक्टर हों और समझ में आने वाली भाषा न हो तो भरोसा भी डगमगाने लगता है। इसी चुनौती को समझते हुए पीजीआई ने इलाज और संवाद के बीच खड़ी भाषा की दीवार को तोड़ने की दिशा में बड़ी पहल की है। अब संस्थान में दक्षिण भारत के साथ ही अन्य गैर हिंदीभाषी क्षेत्र से आए डॉक्टर हिंदी सीख रहे हैं ताकि मरीजों की बात भी समझ सकें और इलाज की जानकारी भी साफ-साफ दे सकें।
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पीजीआई देशभर से आने वाले मरीजों और डॉक्टरों का बड़ा केंद्र है। यहां काफी संख्या में दक्षिण भारत के डॉक्टर कार्यरत हैं जबकि मरीजों का अधिकांश हिस्सा उत्तर भारत से आता है। ऐसे में भाषा का अंतर इलाज के दौरान एक बड़ी चुनौती बनता रहा है। मरीज परेशानी ठीक से नहीं बता पाते और डॉक्टर भी इलाज से जुड़ी बातें पूरी तरह समझा नहीं पाते। इस समस्या के समाधान के लिए पीजीआई प्रशासन और संस्थान की हिंदी समिति ने मिलकर अनूठी पहल शुरू की है। हिंदी समिति की ओर से गैर हिंदीभाषी डॉक्टरों के लिए विशेष हिंदी कक्षाएं चलाई जा रही हैं जहां उन्हें हिंदी बोलने, पढ़ने और लिखने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन में भी जरूरी निर्देश हिंदी में लिख रहे
हिंदी समिति के चेयरमैन प्रो. संजय भड़ाडा ने बताया कि मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अब डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन में भी जरूरी निर्देश हिंदी में लिख रहे हैं। दवा कब और कैसे लेनी है, खाने-पीने में क्या परहेज करना है और किस तरह का व्यायाम करना है, ये सभी बातें सरल हिंदी में लिखी जा रही हैं ताकि मरीज बिना किसी भ्रम के इलाज का पालन कर सकें। उन्होंने बताया कि हिंदी को केवल बोलचाल तक सीमित न रखते हुए मेडिकल शिक्षा में भी मजबूत किया जा रहा है। डॉक्टरों को हिंदी में एजुकेशनल और मेडिकल किताबें लिखने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में मेडिकल की पढ़ाई से जुड़ी सामग्री हिंदी में आसानी से उपलब्ध हो सके।
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ओपीडी और वार्डों में हिंदी भाषा में बनाए गए स्वास्थ्य जागरूकता वीडियो चलाए जा रहे
मरीजों की जागरूकता और मदद के लिए ओपीडी और वार्डों में हिंदी भाषा में बनाए गए स्वास्थ्य जागरूकता वीडियो भी चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही संस्थान में हिंदी में बातचीत और पत्राचार को भी लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। पीजीआई की यह पहल यह साबित करती है कि बेहतर इलाज के लिए केवल आधुनिक मशीनें ही नहीं, बल्कि मरीज की भाषा में संवाद भी उतना ही जरूरी है। भाषा की दूरी खत्म होते ही इलाज ज्यादा प्रभावी, मानवीय और भरोसेमंद बनता है।
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