सेक्टर 16 स्तिथ पंजाब कल्ला भवन में नाटक की प्रस्तुति देते कलाकार।
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चंडीगढ़। जवानों ये सिनेमा घर तो है नहीं। यह जंग का मैदान है। यहां तो लड़ना पड़ेगा और गोली भी खानी पड़ेगी। गोला बारूद कम है। चीन के सैनिकों को पास आने दो। जब नजदीक आएंगे, तब गोली चलाएंगे। उनके हथियार छीनकर उनके हथियारों से ही उन्हें मारेंगे। मौसम की खराबी और हथियार आने में देरी पर मेजर शैतान सिंह भाटी ने अपने जवानों को कहा। यह संवाद मेजर शैतान सिंह भाटी और भारतीय सैनिकों के बीच रेजांगला में भारत चीन युद्ध के दौरान हुई। जैसे ही दमदार संवाद नाटक ‘रेजांगला’ में हुआ तो दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का हौसला बढ़ाया। यह नाटक 17वें टीएफटी विंटर नेशनल थिएटर फेस्टिवल के पहले दिन बुधवार को सेक्टर-16 के पंजाब कला भवन में हुआ। विवेक मिश्रा की लिखी इस नाटक का निर्देशन रवि मोहन ने किया है। रास कला मंच सफीदों जिला जींद के कलाकारों ने इसमें भूमिका निभाई है। नाटक की अवधि एक घंटा 28 मिनट रही।
रास कला मंच के निर्देशक रवि मोहन ने बताया कि नाटक में 1962 का भारत-चीन युद्ध दिखाया गया। 18 नवंबर 1962 का दिवाली का दिन। देश में दिवाली मन रही थी तो जवान गोली खा रहे थे। हमारे देश के 112 सैनिकों की शहादत थी, लेकिन भारतीय सैनिकों ने चीन के 1310 सैनिकों को पत्थर पर पटक पटक कर मारा था। चीन के तीन हजार सैनिकों ने हमला किया था। 13 कुमाऊं की बटालियन की टुकड़ी थी। इस टुकड़ी में 120 सैनिक थे। युद्ध में मात्र आठ सैनिक बचे। और 112 सैनिक शहीद हो गए थे। ये सैनिक हरियाणा के अहिरवाल इलाके के थे। इन सैनिकों में 65 से 70 सैनिक यूपी व अन्य राज्य से थे।
पहले सैनिक की बॉडी नहीं आती थी। लोटे में राख आई थी। भारत की आजादी का शैशव काल था। न हमारे पास बुलेट थे, न जर्सी थी औ न बार्डर सील था। इसके बाद भी हमारे वीर सैनिकों ने चीन को वापस जाने को मजबूर कर दिया था। दो महीनों के बाद शहीद सैनिकों का संस्कार किया गया था। इनमें से हरियाणा के एक ही गांव के आठ सैनिक थे। दो सगे भाई ने शहादत पाई थी। जीजा और साले की भी इस जंग में शहादत हुई। नाटक रेजांगला में ऋषिकांत, अतुल आड़े, रेबिन, अनुराग, पुनीत शुक्ला, अंकित, शिवंग चौबे, विभोर जैन ने भूमिका निभाई। बैक स्टेज पर शिवानी दुबे, स्वतिका शर्मा, अंकिता, प्रियंका रंजन ने भूमिका निभाई।