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पारंपरिक और बिरासती गीतों से विद्यार्थियों ने मोहा मन

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चंडीगढ़। डीएवी कॉलेज-10 में आयोजित पंजाब यूनिवर्सिटी यूथ फेस्टिवल के दूसरे दिन दूसरे दिन विद्यार्थियों ने पारंपरिक और पंजाब के विरासती गीत से मन मोह लिया। इस दौरान युवाओं ने कवि श्री, वार सिंगिंग, काली सिंगिंग, चिक्कू मेकिंग, गुड्डियां पटोले मेकिंग, परांदा मेकिंग, मिट्टी के खिलौने बनाने, रस्सा वट्टना, पीड्ढी मेकिंग आदि प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। युवाओं ने बताया यूथ फेस्टिवल में राज्यों की पारंपरिक कलाओं के साथ उनके कल्चर के बारे में सीखने को मिलता है जो वर्तमान के टैक्नोलॉजी के युग में खत्म हो गया है।
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पीजीजीसी-11 के छात्र जुझार सिंह ने बताया कि वे जम्मू के रहने वाले हैं, लेकिन पिछले तीन बार से यूथ फेस्टिवल में भंगड़ा में प्रस्तुति दे रहे हैं। उन्हें पंजाब के फोक डांस फॉर्म्स झूमर, मलवई, लुड्डी आदि के बारे में सीखने को मिला है। प्रतियोगिता में छिक्कू में किंग में डीएवी कॉलेज-10, गुड़िया बनाने में एसडी कॉलेज, टोकरी, परांदा बनाने में एसडी कॉलेज, कविता लेखन में डीएवी-10, कहानी लेखन में सीसीईटी-26, इंग्लिश हैंड राइटिंग में आर्ट्स कॉलेज-10 व पंजाबी हैंडराइटिंग में खालसा कॉलेज-26 को पहला पुरस्कार मिला।
भंगड़ा-झूमर की बोलियों में राज्य की खेती और मेलों की झलक
पीयू से प्रतिभागी हर्षदीप सिंह बाठ ने बताया कि दो साल पीजीजीसी-11 कॉलेज को फोक डांस झूमर और पिछले दो साल से पीयू की तरफ से भंगड़ा और झूमर की टीम में प्रतिभागी की तौर पर हिस्सा ले रहा हूं। एक बार भंगड़ा के लिए लाइव संगीत में गायक की भूमिका भी निभाई है। इन लाइव कल्चरल प्रतियोगिताओं में राज्यों खासकर पंजाब की खेती, मेले, मौसमों, फसलों, योद्धाओं इत्यादि के बारे में सीखने को मिलता है। बोलियां और पारंपरिक गीतों में इन सब को शामिल किया जाता है।
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